सागर बनो संकुचित मत बनो- आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में आचार्य संघ का भव्य मंगल प्रवेश
By Goapl Gupta ·
28 Feb 2026 ·
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सागर बनो संकुचित मत बनो- आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज
आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में आचार्य संघ का भव्य मंगल प्रवेश
उदयपुर जनतंत्र की आवाज। अचार्य विहर्ष सागर जी महाराज (16 पिच्छी) का भव्य शोभा यात्रा के साथ आदिनाथ मंदिर सेक्टर 11 मंगल में प्रात: 8 बजे मंगल प्रवेश हुआ। ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा एवं महामंत्री कमलकान्त जोावत ने बताया कि आचार्यससंघ प्रात: आयड़ मन्दिर से कृषि मंडी गेट तक पहुंचे जहां से गाजे-बाजे के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई जो अग्रवाल धर्मशाला होते हुए श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। वहां पहुंचने के बाद श्रावक-श्राविकाओं ने जयकारों के साथ जगह- जगह पुष्प वर्षा की एवं आचार्य संघ का पाद प्रक्षालन कर उनकी भव्य मंगल अगवानी की। आदिनाथ महिला मण्डल ने मंगल कलशों से स्वागत किया। इसदौरान गुरु सेवा संघ के मदन देवड़ा, महावीर सिंघवी, आशा देवड़ा केलाश चित्तौड़ा, पारस सिंघवी, नैना वाखारिया रोशन लाल गदावत मौजूद रहे।
मंगल प्रवेश के बाद विभिन्न मांगलिक आयोजन हुए। पूर्वाचार्य की पूजन, अर्घ समर्पण, आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, दीप प्रज्वलन , जिनवाणी भेंट आदि मांगलिक आयोजन हुए। धर्मसभा के दौरान मुनि विजयेश सागर महाराज का मुनि दीक्षा दिवस भी मनाया गया। चित्तोड़ा ने बताया कि शनिवार को आचार्य मयंक सागर जी महाराज का प्रात: 9 बजे आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में भव्य मंगल प्रवेश होगा।
सागर बनो, संकुचित मत बनो- आचार्य विहर्ष सागर
इसके बाद आयोजित धर्मसभ में आचार्यश्री विहर्षसागर जी महाराज ने ऐसी ज्ञान की गंगा बहाई कि हर कोई उन्हें तन्मयता से सुनता ही रहा। गुरुदेव ने अपने प्रवचन में सागर बनो संकुचित मत बनो के साथ समाज को एकता का संदेश देते हुए कहा कि कभी भी व्यर्थ का पैसा मत खर्च करो लेकिन जब धर्म प्रभावना की बात हो तो पीछे भी मत हटो। कभी भी यश के लिए काम मत करो लेकिन काम ही ऐसा यशस्वी करो कि यश अपने आप ही मिल जाए। जीवन ऐसे जियो की किसी पर बोझ ना बनो। लेकिन जीवन में कर्म ही ऐसे करो कि आपके सारे बोझ हल्के हो जाए। जो धर्म के लिए जीता है वह संसार सागर में तिर जाता है और जो धर्म को अपने हिसाब से चलाता है वह संसार सागर में डूब जाता है। इसलिए कभी भी एक छत्र राज करने का मत सोचो बल्कि एक ही छत के नीचे सब को साथ लेकर काम करने की सोचो। जो एक ही छत के नीचे सबको साथ लेकर काम करता है उसका अपना आप ही एक छत्र राज हो जाता है। मुनि विजयेश सागर महाराज ने कहा कि अआचार्य विहर्ष सागर महाराज संघ का पहली बार राजस्थान में प्रवेश होकर सलूंबर में चातुर्मास हुआ और उसके बाद पहली बार झीलों की नगरी उदयपुर में मंगल प्रवेश हुआ।