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बिना पुण्य कार्यों के जीवन में सुख- शांति नहीं मिल सकती: आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज प्रात: सेक्टर 11 में हुआ आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज एवं आचार्यश्री मयंकसागरजी महाराज का महा मिलन

By Goapl Gupta · 28 Feb 2026 · 33 views
बिना पुण्य कार्यों के जीवन में सुख- शांति नहीं मिल सकती: आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज
प्रात: सेक्टर 11 में हुआ आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज एवं आचार्यश्री मयंकसागरजी महाराज का महा मिलन

उदयपुर जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में विराजित आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज के दर्शनार्थ उदयपुर सहित आस-पास के क्षेत्रों से श्रावक- श्राविकाओं पहुंचने लगे हैं। आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि प्रात:सेक्टर 11 में आचार्यश्री विहर्ष सागरजी महाराज एवं आचार्यश्री मयंक सागरजी महाराज का आदिनाथ भवन में महा मिलन हुआ। इन भावुक पलों के दौरान उपस्थित सैंकड़ों श्रावक- श्राविकाओं ने गुरूदेव के जयकारों से आसमान गूंजा दिया।
इससे पूर्व प्रात:काल श्रीजी की शंतिधारा, पंचामृत अभिषेक जैसे मांगलिक आयोजन हुए। धर्मसभा के दौरान आचार्यश्री को शास्त्र भेंट, गुरूदेव का पाद प्रक्षालन के मांगलिक आयोजन हुए। इस दौरान अशोक शाह, मदन देवड़ा महावीर सिंघवी आदि उपस्थित रहे। सायंकाल भव्य आरती का आयोजन हुआ।
बिना पुण्य कार्यों के जीवन में सुख- शांति नहीं मिल सकती: आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज
शनिवार प्रात: आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रावक- श्राविाकओं से कहा कि मनुष्य जन्म कोई न कोई लक्ष्य लेकर आया है उसमें आत्मा का कल्याण करना, और उसके अनंत पर्याय में राग, द्वेष, मोह, पाप, कषाय के निमित्त जो कर्मो का बंध बंंधा है उनसे मुक्ति पाना है। कई लोगों के बच्चों को परेशानी नही देखनी पड़ती, क्योकि वह पुण्य लेकर आए हैं। दुनिया में गरीब को मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि यह उनक ेपूर्व जन्मों का बन्ध है। उनके पुण्य कार्यों में कहीं न कहीं कोई कमी रह गई थी। सारी सुख सुविधा पुण्य से मिलती है। कहने का तात्पर्य यह है कि बिना पुण्य र्काों के जीवन में सुख- शांति नहीं मिल सकती है।
लेकिन मनुष्य कहता है कि वो पुष्य कहा से लाऊं। भगवान तुम्ही रिझाऊं। पुण्य किसी दुकान, शोरूम या मॉल में नहीं मिलता है बल्कि पुण्य तो किया जाता है। पिछले कर्म लेकर आये हो, बीमार रहते हो, बीपी, सुगर आदि से परेशान रहते हो। व्यक्ति के स्वयं के साथ उनके पुण्य और पाप लेकर आता है। पुष्य फला अरहंत:। पुण्य के प्रताप से, अरहंत अवस्था मिलती है। तो छोटी-छोटी चीजे जल्दी मिल जाती है। पुण्य का अर्जन तो साधु को आहार दान देने और वैयावृत्ति करने से होता है।
गुरूदेव ने अशांका जताई कि दो ग्रहों के मिलने से इस वर्ष 2026 में महामारी या कोई भी विपत्ती-आपत्ति या संकट आदि आ सकते हैं। लेकिन इन सबसे बचने का एक ही उपाय है। आप अपने अहंतों को जागृत करें और पुण्य कार्य करते रहें जिससे इन सभी विपत्तियों, संकटों और व्याधियों से बचा जा सके।

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