कल्याण जी का रास्ता में विराजे हैं चतुर्भुज कल्याणकारी विष्णु स्वरूप कल्याण धणी
By Goapl Gupta ·
08 Mar 2026 ·
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*कल्याण जी का रास्ता में विराजे हैं चतुर्भुज कल्याणकारी विष्णु स्वरूप कल्याण धणी******
चतुर्भुज कल्याणकारी विष्णु की उपासना परंपरा के भगवान कल्याण जी का मंदिर होने से कल्याण जी का रास्ता बरसों से धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है ।
डिग्गी कल्याण जी मोत्यां हाला के ही स्वरूप काले पाषाण से बने चांदपोल बाजार के रास्ते में विराजमान इन कल्याण जी की ढूंढाड़ में बहुत बड़ी मान्यता है। इतिहासकारों का मानना है की डिग्गी के कल्याण जी की तरह यह मंदिर भी सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध है।
"श्री कल्याण मोत्यांहाला" की मूर्ति सफेद और जयपुर के इन कल्याण धनी की मूर्ति श्याम वर्ण की है विष्णु स्वरूप कल्याण के चारों तरफ 24 अवतार हैं। जयपुर के बड़े मंदिरों में से एक कल्याण जी का यह मंदिर भी में चार चौक है ।
कहते हैं कि सिंधी कैंप के स्थान पर कभी एक बावड़ी में से कल्याण जी की है मूर्ति मिली थी। माजी साहिबा उदयभानोत जी के कामदार कान जी कायस्थ ने कल्याण धनी को इस मंदिर में प्रतिस्थापित किया था। इसके पूर्व यह विग्रह कहां रहा कुछ कहा नहीं जा सकता।
कानजी कायस्थ की गली कल्याण की मंदिर के सामने है जेठ के महीने में नरसिंग लीला ,वराह अवतार की झांकियां के अलावा गोपाल महाराज में भौरी देवी कुमावत भागवत कथा सुनाती है। नाग पंचमी को सत्संग तथा होली पर फाग उत्सव होता है ,फाल्गुन में रास्ते में गाली गायन भी होता है ।
महाराजा के फोटोग्राफर उदय राम तस्वीर वालों की गाली भी यहां है। मंढा और खंडेल की हवेलियों के बाहर कभी हाथी घोड़े रहते थे । कल्याण व्यायाम शाला में उस्ताद कलजी पहलवान लाठी बाजी के पहलवान रहे ।
समाज सेवी विजयपाल कुमावत के मुताबिक विख्यात पहलवान चंदगीराम और गुरु हनुमान भी कलजी के अखाड़े में आए थे।
कुमावत समाज का बाल निवास और कायस्थोंकी बगीची भी मशहूर है।
खस की टाटी और फूंस के छप्पर बनाने वाले सिरकीगर और मिट्टी से धातु निकलने वाले न्यारे रहते हैं। वर्षों से संगीत के वाद्य यंत्रों की बिक्री और मरम्मत करने वालों के ढोलक ,तबला नगाड़ा ,तानपुरा ,हारमोनियम, गिटार, सितार आदि का अच्छा काम रहा है। रास्ते के नुक्कड़ से दूसरे चौराहे पर कभी फूलजी का बनाया कलाकंद बहुत मशहूर था । चांदपोल हनुमान जी के मुखारविंद का प्रसाद यही से जाता था । हकीम मोहम्मद यूसुफ नामी जर्रा थे ।
घासी महाराज अच्छे सितार वादक थे रूपनारायण दाधीच माने हुए ज्योतिषाचार्य थे ।
रिपोर्टर *जनतंत्र की आवाज* राजस्थान