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आवश्यकता केवल उसे सही दिशा और समय देने की

By Goapl Gupta · 02 Apr 2026 · 6 views
प्रिय अभिभावकों,

सादर निवेदन है कि वर्तमान समय में एक प्रवृत्ति तेजी से देखने को मिल रही है, जिसमें कई अभिभावक अपने बच्चों का नाम स्थानीय विद्यालयों से हटाकर बड़े ब्रांड एवं अधिक शुल्क वाले विद्यालयों में प्रवेश दिला रहे हैं।
निश्चित रूप से हर अभिभावक अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए सर्वोत्तम विकल्प चुनना चाहता है, परंतु यह भी विचारणीय है कि केवल विद्यालय का नाम या शुल्क ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी नहीं होता। अनेक बार शैक्षणिक स्तर में बहुत अधिक अंतर नहीं होता, फिर भी हम बाहरी आकर्षण से प्रभावित हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, दूरस्थ विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिदिन लगभग 2 घंटे यात्रा में व्यतीत करने पड़ते हैं, जिससे वे शारीरिक एवं मानसिक रूप से थक जाते हैं। यह थकान उनके सीखने की क्षमता और एकाग्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

एक और चिंताजनक पहलू यह है कि आजकल बहुत कम उम्र में ही बच्चों को “Pre-Foundation” और “Foundation” जैसी प्रतिस्पर्धात्मक दौड़ में शामिल कर दिया जाता है। इसके लिए अभिभावक कई गुना अधिक शुल्क देने को तैयार हो जाते हैं, जबकि इस अवस्था में बच्चों के मूलभूत ज्ञान, नैतिक मूल्यों और प्राकृतिक प्रतिभा के विकास पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि हम इस प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में अपने बच्चे की मौलिकता का मर्दन कर रहे हैं?
“हर बच्चा अपने आप में विशेष होता है, आवश्यकता केवल उसे सही दिशा और समय देने की होती है।”

अतः आप सभी से विनम्र निवेदन है कि किसी भी निर्णय से पहले अपने बच्चे की समग्र वृद्धि—उसके स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, मूलभूत शिक्षा और प्राकृतिक प्रतिभा—को प्राथमिकता दें।

*दौड़ में दुनिया के शामिल हम,*
*बचपन को भूलते जा रहे,*
*सपनों का बोझ उठाए बच्चे,*
*खुद से ही दूर होते जा रहे।*

*कहीं इस अंधी प्रतिस्पर्धा में,*
*मौलिकता का मर्दन न हो जाए,*
*हर बच्चा जो खास है अपने में,*
*भीड़ में कहीं खो न जाए।*

*रुककर सोचें, समझें हम,*
*क्या सच में यही है विकास?*
*बचपन को बचपन रहने दें,*
*यही है सबसे बड़ी आस।*

निवेदक
पवन गोयनका
सचिव
बगड़िया बाल विद्या निकेतन

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