सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जवाब: इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के मामलों में बडी ताकत बना भारत, मोबाइल का निर्यात 127 गुना बढ़ा
By Goapl Gupta ·
03 Apr 2026 ·
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सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जवाब: इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के मामलों में बडी ताकत बना भारत, मोबाइल का निर्यात 127 गुना बढ़ा
-सांसद डॉ मन्नालाल रावत के प्रश्न पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने दी जानकारी
-इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का उत्पादन 2024-25 में 6 गुना बढकर 12 लाख करोड का हुआ
-मोबाइल फोन का उत्पादन 2024-25 में 28 गुना बढकर 5.45 लाख करोड का हुआ
-सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम से लाखों युवाओं का नौकरियों का रास्ता खुला
-मात्र चार साल की छोटी अवधि में सरकार ने लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी
उदयपुर। विगत 11 सालों में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के मामलों में एक बडी ताकत बन गया है। पिछले 11 सालों में भारत से मोबाइल का निर्यात 127 गुना बढ़ गया है। सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की सफलता और सेमीकंडक्टर में क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में उपकरण और सामग्री के निर्माण, डिजाइन फुल स्टैक, भारतीय आईपी और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की भी घोषणा कर दी है।
सांसद डॉ मन्नालाल रावत द्वारा संसद में पूछे गए अतारांकित प्रश्न पर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी दी।
सांसद डॉ रावत ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम, वर्तमान में देश में स्थापित या स्थापित की जा रही सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की संख्या आदि को लेकर प्रश्न किए थे।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का उत्पादन 1.9 लाख करोड था जो 2024-25 में 6 गुना बढकर 12 लाख करोड का हो गया। 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात 38 हजार करोड का था जो 2024-25 में 8 गुना बढकर 3.3 लाख करोड का हो गया। मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 में 18 हजार करोड का था जो 2024-25 में 28 गुना बढकर 5.45 लाख करोड का हो गया। 2014-15 में मोबाइल फोन का निर्यात 1500 करोड का था जो 2024-25 में 127 गुना बढकर 2 लाख करोड का हो गया है। इसी तरह मोबाइल फोन आयातीत ईकाइयां 2014-15 में कुल मांग का 75 प्रतिशत थी जो 2024-25 में कुल मांग का केवल 0.02 प्रतिशत रह गई।