सचिन पायलट फैक्टर के बीच पारस गुर्जर का ‘त्याग’ या सियासी दांव? नामांकन से पीछे हटे पारस, 9 अप्रैल को जयपुर में शक्ति प्रदर्शन के साथ होगा बड़ा ऐलान
By Goapl Gupta ·
03 Apr 2026 ·
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सचिन पायलट फैक्टर के बीच पारस गुर्जर का ‘त्याग’ या सियासी दांव?
नामांकन से पीछे हटे पारस,
9 अप्रैल को जयपुर में शक्ति प्रदर्शन के साथ होगा बड़ा ऐलान
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले युवा नेता पारस गुर्जर द्वारा नामांकन नहीं भरने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है। मजबूत दावेदार माने जा रहे पारस के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार पारस गुर्जर को प्रदेशभर के कई जिलों का व्यापक समर्थन हासिल था और उनकी दावेदारी को काफी मजबूत माना जा रहा था। ऐसे में अचानक नामांकन से पीछे हटना केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि उन्हें मनाने के लिए जयपुर से लेकर दिल्ली तक कई बड़े नेताओं ने प्रयास किए और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी का आश्वासन भी दिया गया।
पायलट फैक्टर बना चर्चा का केंद्र.
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि पारस गुर्जर का यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के प्रति उनकी निष्ठा और दीर्घकालिक सियासी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। माना जा रहा है कि संगठन में आगे बड़ी भूमिका को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फिलहाल यह ‘त्याग’ किया है। इसे केवल एक पद से पीछे हटना नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक पारी की तैयारी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब किसे मिलेगा पारस का समर्थन?.
नामांकन नहीं भरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पारस गुर्जर किस उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। फिलहाल उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वे अपने समर्थकों और युवा कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद किसी मजबूत नाम के साथ सामने आएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पारस का समर्थन जिस उम्मीदवार को मिलेगा, उसकी जीत की राह काफी आसान हो सकती है।
9 अप्रैल को जयपुर में शक्ति प्रदर्शन.
इस बीच पारस गुर्जर के समर्थकों ने 9 अप्रैल को जयपुर में एक बड़े युवा कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी शुरू कर दी है। इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जहां हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बड़ा सियासी संदेश दिया जाएगा। संभावना है कि इसी मंच से पारस अपने समर्थित उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकते हैं।
2028 चुनाव से पहले अहम संकेत.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है। एक तरफ पारस गुर्जर का यह कदम युवा कार्यकर्ताओं के बीच त्याग और अनुशासन का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर यह पायलट गुट की संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा भी है। यदि पारस अपने समर्थकों को एकजुट रखने में सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में वे संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।