संघर्ष से सफलता तक: सुमन राजपूत बनीं उदयपुर की ‘पानी पुरी वाली’ पहचान, पति विक्रम सिंह का भी मिला साथ
By Goapl Gupta ·
04 Apr 2026 ·
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संघर्ष से सफलता तक: सुमन राजपूत बनीं उदयपुर की ‘पानी पुरी वाली’ पहचान, पति विक्रम सिंह का भी मिला साथ
राजस्थान उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल । उदयपुर शहर में इन दिनों “पानी पुरी वाली” के नाम से पहचान बना रहीं सुमन राजपूत की सफलता की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुमन का जन्म 8 जून 1991 को राजसमंद जिले के आमेट कस्बे में हुआ था। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच पली-बढ़ी सुमन ने कभी हार नहीं मानी और आज अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बना ली है।
उदयपुर के सूरजपोल क्षेत्र में लगने वाली उनकी पानी पुरी की ठेली हर शाम लोगों से गुलजार रहती है। उनके बनाए पानी पुरी का स्वाद ऐसा है कि एक बार खाने वाला ग्राहक बार-बार लौटकर आता है। खास मसालों और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हुए सुमन अपने ग्राहकों को ताजगी और गुणवत्ता का भरोसा देती हैं। यही कारण है कि छात्र, पर्यटक, स्थानीय निवासी—सभी उनकी ठेली पर नजर आते हैं।
सुमन राजपूत बताती हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन इस कठिन समय में उनके पति विक्रम सिंह ने उनका पूरा साथ दिया। ठेला लगाने से लेकर सामग्री की व्यवस्था करने और रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाने तक, उनके पति हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
सुमन कहती हैं कि अगर उनके पति विक्रम का सहयोग और हौसला न मिलता, तो शायद वह आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। उनके पति न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें लगातार प्रेरित करते रहे, जिससे सुमन का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ।
आज स्थिति यह है कि “पानी पुरी वाली” के नाम से ही लोग उन्हें पहचानने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके काम की चर्चा हो रही है और कई लोग उनकी कहानी को साझा कर रहे हैं। सुमन की यह सफलता केवल एक ठेली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि सुमन न केवल स्वादिष्ट पानी पुरी बनाती हैं, बल्कि अपने व्यवहार से भी ग्राहकों का दिल जीत लेती हैं। उनकी मुस्कान और आत्मीयता लोगों को खास अनुभव देती है। यही वजह है कि उनकी ठेली अब केवल खाने की जगह नहीं, बल्कि लोगों के मिलने-जुलने का एक पसंदीदा स्थान बन चुकी है।
सुमन का कहना है कि वह अपने काम को और आगे बढ़ाना चाहती हैं और भविष्य में एक छोटी दुकान खोलने का सपना देख रही हैं। उनकी यह यात्रा यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और पारिवारिक सहयोग से कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है।
उदयपुर में सुमन राजपूत की यह कहानी आज संघर्ष से सफलता तक के सफर का एक जीवंत उदाहरण बन गई है, जो हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।