सुविवि- पत्रकारिता विभाग में नारद जयन्ती पर विचार गोष्ठी: एआई युग में पत्रकारिता की चुनौतियाँ पर चर्चा
By Goapl Gupta ·
04 May 2026 ·
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सुविवि- पत्रकारिता विभाग में नारद जयन्ती पर विचार गोष्ठी: एआई युग में पत्रकारिता की चुनौतियाँ पर चर्चा
उदयपुर विवेक अग्रवाल। तकनीकी कुशलता के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने पत्रकारिता के कामकाज को तो सुगम बना दिया है, लेकिन साथ ही फेक न्यूज़ के निर्माण और एआई जनित कंटेंट ने इस क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
यह बात मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा नारद जयन्ती के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में उभरकर सामने आई।
गोष्ठी की अध्यक्षता सामाजिक विज्ञान संकाय की चेयरपर्सन प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर ने की। मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रवि शर्मा ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर डॉ. बालूदान बारहट, डॉ. सुरेश सालवी, डॉ. खुशपाल गर्ग, डॉ. भारत भूषण ओझा और विपिन गांधी ने भी पत्रकारिता के भविष्य, एआई के प्रभाव और नैतिक पत्रकारिता की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की।
विभागाध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य ने विषय का प्रवर्तन करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक ने सूचना के प्रसार को तेज़ किया है, लेकिन सत्य की रक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखना आज सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने एआई टूल्स के दुरुपयोग से उत्पन्न फेक न्यूज़ और डीप फेक जैसे कंटेंट और उस से उपजी समस्याओं पर चिंता जताई।
प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसे किसी भी प्रकार की तकनीकी दखल से अपनी स्वायत्तता और विश्वसनीयता नहीं खोनी चाहिए। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से अपील की कि वे पारंपरिक पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखते हुए नई तकनीकों का सकारात्मक उपयोग करें।
मुख्य वक्ता डॉ. रवि शर्मा ने एआई के दोनों पहलुओं — सुविधा और खतरे — पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा, “एआई अब समाचार लिखने, तथ्यों की जाँच करने और सामग्री तैयार करने में मदद कर रहा है, लेकिन जब यह बिना मानवीय निगरानी के इस्तेमाल होता है तो फेक न्यूज़ फैलाने का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।” उन्होंने मीडिया संस्थानों को एआई जनित कंटेंट को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने और फैक्ट चेकिंग तंत्र को मजबूत करने की सलाह दी।
अन्य वक्ताओं में डॉ. बालूदान बारहट ने ग्रामीण क्षेत्रों में फेक न्यूज़ के प्रभाव पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. सुरेश सालवी ने सोशल मीडिया और एआई के संयोजन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की। डॉ. खुशपाल गर्ग, डॉ. भारत भूषण ओझा और विपिन गांधी ने व्यावसायिक नैतिकता, मीडिया शिक्षा और भविष्य की रणनीति पर अपने सुझाव दिए।
अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।