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आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का दूसरा दिन रहा ज्ञान, भक्ति और संस्कारों से ओत-प्रोत

By Goapl Gupta · 29 Dec 2025 · 12 views
आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का दूसरा दिन रहा ज्ञान, भक्ति और संस्कारों से ओत-प्रोत


उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। श्री कुन्दकुन्द कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति, उदयपुर के तत्वावधान में हुमड़ भवन, गरियावास, उदयपुर में 28 दिसम्बर 2025 से 31 दिसम्बर 2025 तक आयोजित चार दिवसीय आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हो रहा है। समिति के अध्यक्ष अभय बण्डी ने बताया कि इस पावन शिविर का मुख्य उद्देश्य वीतराग विज्ञान की सरल, प्रभावशाली एवं व्यवहारिक समझ प्रदान करते हुए आत्मबोध, सही जीवन-दृष्टि, भक्ति, ज्ञान और संस्कार का समन्वय स्थापित करना है। शिविर में बच्चों, युवाओं एवं श्रावक-श्राविकाओं के लिए पृथक-पृथक आध्यात्मिक एवं संस्कारपरक सत्रों का आयोजन किया गया है।
शिविर के विधान आमंत्रणकर्ता वीरेंद्र धन्नावत है। ध्वजारोहण करता कुलदीप- नकुल है। इस अवसर पर कलश विराजमानकर्ता के रूप में गजेंद्र धन्नावत, श्रीमती शर्मिला–पंकज जैन, श्रीमती एकता–ललित गदिया एवं श्रीमती राजरानी वक्तावत रहे। वहीं जिनवाणी विराजमानकर्ता के रूप में श्रीमती रेखा वालावत, श्रीमती हेमलता–चेतन वक्तावत, श्रीमती ललिता–मदन जैन एवं श्रीमती ललिता गोदावत रहे। एवं चित्र अनावरणकर्ता हितेश शांतिलाल कोठारी, कचरूलाल मुकेश मेहता, नरेंद्र शंभू मेहता रहे।
शिविर का द्वितीय दिवस= आध्यात्मिक शिक्षण शिविर का द्वितीय दिवस विशेष रूप से समयसार के गूढ़ तत्त्वों की विवेचना हेतु समर्पित रहा।
प्रात:कालीन समय में पूजन एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का आयोजन अत्यंत भक्तिमय वातावरण में किया जा रहा है। यह विधान विधानाचार्य डॉ. तपिश शास्त्री, डॉ. महावीर शास्त्री एवं शाश्वत बालाओं के मधुर आध्यात्मिक भक्ति-स्वरों के सहयोग से सम्पन्न हो रहा है, जिससे सम्पूर्ण वातावरण श्रद्धा एवं साधना से ओतप्रोत बना हुआ है।तत्पश्चात पं. रमेश जी शास्त्री, सोनगढ़ ने समयसार जी ग्रंथ की 87-88वीं गाथा पर विस्तारपूर्वक प्रवचन किया। उन्होंने आत्मा की शुद्ध सत्ता, परद्रव्य से भिन्नता तथा आत्मा के वास्तविक स्वरूप को अत्यंत सरल एवं प्रभावी शैली में समझाते हुए श्रोताओं को आत्मचिन्तन की दिशा में प्रेरित किया।
इसी क्रम में पं. धनसिंह जी ज्ञायक, पिड़ावा ने समयसार जी ग्रंथ के मंगलाचरण पर प्रवचन देते हुए कारण परमात्मा एवं कार्य परमात्मा की सारगर्भित विवेचना प्रस्तुत की। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा अपनी शुद्ध अवस्था में कारण परमात्मा है और जब वही आत्मा पूर्ण ज्ञान एवं अनुभूति में प्रतिष्ठित हो जाती है, तब कार्य परमात्मा की सिद्धि होती है। आत्मा के इस विकास-क्रम को समझना ही सच्चे आध्यात्मिक जीवन की कुंजी है।
शिविर के अंतर्गत प्रात: एवं सायंकाल दोनों समय बच्चों की विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कक्षाओं में पं. हितंकर शास्त्री एवं पं. भव्य शास्त्री बच्चों को जैन धर्म के मूल धार्मिक एवं आध्यात्मिक सिद्धांतों से सरल एवं रोचक शैली में अवगत करा रहे हैं।
सायंकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुति: सायंकालीन सत्र में वीतराग विज्ञान पाठशाला, सेक्टर-11 के बच्चों द्वारा प्रस्तुत आध्यात्मिक नाटक बंधन का भ्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। नाटक के माध्यम से यह प्रभावी संदेश दिया गया कि वास्तविक बंधन बाहरी नहीं, बल्कि आत्मा की गलत मान्यताओं एवं अज्ञान से उत्पन्न होते हैं।
पाठशाला के संयोजक डॉ. निलेश जैन ने नाटक के संदर्भ में बताया कि यह प्रस्तुति बच्चों में आत्मचिन्तन, वैराग्य एवं सही दृष्टि विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, ताकि बाल्यकाल से ही वे वीतराग विज्ञान के मूल भावों को आत्मसात कर सकें। नाटक को उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं ने अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायक बताते हुए मुक्त कंठ से अनुमोदना की। एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान ही खुश, स्वभाव,साध्य, पुण्यांश, अन्वय, देशना, मोक्षा, अद्वेत बच्चों ने ग्रंथ आधारित कण्ठ पाठ प्रस्तुत किये। इन सभी बच्चों के श्रेष्ठ उद्यम को देखकर सभी को पुरुस्कृत किया गया है। शिविर के दौरान स्थानीय विद्वानों का सत्समागम भी निरंतर प्राप्त हो रहा है, जिनमें पं. खेमचंद शास्त्री, पं. ऋषभ शास्त्री, पं. संदीप मेहता, पं. गजेंद्र शास्त्री, पं. प्रशांत शास्त्री सहित अनेक विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके मार्गदर्शन एवं सान्निध्य से शिविर का आध्यात्मिक स्तर और अधिक ऊँचाइयों को छू रहा है। आयोजन समिति ने समस्त श्रावक-श्राविकाओं, बच्चों एवं युवाओं से इस पावन आध्यात्मिक अवसर का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। शिविर के आगामी दिनों में भी प्रवचन, प्रश्नोत्तर सत्र, इंटरैक्टिव सेशन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे।

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