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दुर्लभ मनुष्य भवः विषय पर मोटिवेशनल स्पीच हम पूरी जिंदगी दोनों हाथों से समेटते रहे, खाली हाथ जानें के लियेः डाॅ.एस.पी.भारील्ल

By Goapl Gupta · 07 Jan 2026 · 11 views
दुर्लभ मनुष्य भवः विषय पर मोटिवेशनल स्पीच
हम पूरी जिंदगी दोनों हाथों से समेटते रहे, खाली हाथ जानें के लियेः डाॅ.एस.पी.भारील्ल

उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। मोटिवेशनल स्पीकर डाॅ.एस.पी.भारील्ल ने कहा कि जीवन में असली दौलत यह नहंी है कि जो पिताजी हमारें लिये छोड़ गये है। हम पूरी जिदंगी दोनांे हाथों से समेटते रहे, सिर्फ इस जहंा से खाली हाथ जानें के लिये। हम यह क्यों कर रहे है, इसका हमें पता ही नहीं है। इस पर हमें विचार करना चाहिये कि हमें यह मनुष्य भव मिला है किसलिये।
वे आज रात्रि को हिरणमगरीे से. 11 स्थित निवास स्थान पर स्व. लक्ष्ीमचन्द भोरावत के निधन पर आयोजित दुर्लभ मनुष्य भव विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबूजी के साथ उनके संस्कार गये जो उन्होंने जीवन भर जीयें। उनकी पुस्तक जिदंगी बेनकाब के प्रथम चेप्टर पर मेरी शेाक सभा के सन्दर्भ में बोलते हुए कहा कि हम वहीं सुनना पसन्द करते है जैसा हम चाहते है। हमें अपने आपका आन्तरिक आंकलन करना चाहिये हम वास्तविक रूप में कैसे है।
डाॅ.भारील्ल ने कहा कि जैसे हम है और वैसा ही हमारी कब्र लिखा जाये तो कैसा लगेगा। इस पर सोते समय विचार करना चाहिये। कभी तो अपनें आप को आईना दिखाना चाहिये क्योंकि मुझे पता है मेरी शोक सभा होगी तो मेरे बारें में क्या-क्या बोला जायेगा। मनुष्य की मृत्यु होने पर पहले दिन जो दुख होता है वह दिन-प्रतिदिन कम होता चला जाता है। जब यहीं वास्तविकता है तो क्यों रो रहे हो।
उन्होंने कहा कि दस रूपेयं की कुल्फी पिघल न जायें उसके लिये अनेक जतन करते है लेकिन हमारी जिदंगी दिन प्रतिदिन पिघल रही है उसके लिये हमें होश नहीं है और इसमें कुल्फी की भंाति हमारें हाथ में अंत में लकड़ी ही रह जाती है। हमें यह पता हीं नहीं है कि हमें यह जीवन क्योंकि मिला और इसमे क्या करना है। इसके लिये हम चिन्तित नहंी है। हमें मृत्यु का महोत्सव मनाना चाहिये। मरेनं की बात करना अशुभ नहीं होता है। श्मशान में जायें तो सोचे की हमारी भी गति ऐसी ही होने वाली है। दुनिया से जाना निश्चित है, तारीख भी लिख दी गई है लेकिन वह हमें दिखाई नहीं दे रही है। इस मनुष्य भव में वह कार्य करें जो हम करनें आये है।
इससे पूर्व डाॅ. जिनेन्द्र शास्त्री ने उत्साह का आयोजन होने पर शरीर में उत्साह का उत्र्सजन होता है। पिता की झलक पुत्र में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पिता के नाम पर ट्रस्ट बनाकर समाज की निर्धन बालिकाअें को शिक्षा में छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।
डाॅ. कपिश जैन ने स्व.लक्ष्मीचन्द भोरावत का परिचय दिया। प्रारम्भ में शाश्वत धाम की बालिकाओं ने गीत प्रस्तुुत किया। कार्यक्रम का संचालन ़ऋषभ जैन ने किया। इस अवसर पर अनेक समाजजन,धर्मप्रेमी महिला-पुरूष मौजूद थे।

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