ShubhBhaskar
JANTANTRAKI AWAZ
E Paper

भागवत महापुराण जीवन की समस्याओं का अचूक व्यावहारिक मैनुअल: रासेश्वरी देवी जी आशीष वाटिका में नौ दिवसीय भागवत ज्ञान रहस्य का भव्य शुभारंभ, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

By Goapl Gupta · 18 May 2026 · 3 views
भागवत महापुराण जीवन की समस्याओं का अचूक व्यावहारिक मैनुअल: रासेश्वरी देवी जी
आशीष वाटिका में नौ दिवसीय भागवत ज्ञान रहस्य का भव्य शुभारंभ, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल।
ब्रज गोपिका सेवा मिशन के तत्वावधान में आज से हिरण मगरी सेक्टर-13 स्थित 'आशीष वाटिका' में भव्य नौ दिवसीय "पंचम वेद श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य" महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के प्रथम दिन व्यासपीठ से जगद्गुरु उत्तम स्वामी श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका पूजनीया रासेश्वरी देवी जी ने दीप प्रज्वलन कर ज्ञान यज्ञ का आगाज़ किया। इससे पूर्व क्षेत्र में भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें मातृशक्ति ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पूजनीया रासेश्वरी देवी जी ने एक बहुत ही स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मैं कोई व्यावसायिक कथावाचक नहीं, बल्कि अपने गुरुदेव की धर्म प्रचारिका हूँ। एक कथावाचक और धर्म प्रचारक में बड़ा अंतर होता है; धर्म प्रचारक का कोई निजी स्वार्थ या उदर-पोषण का उद्देश्य नहीं होता, उसका एकमात्र लक्ष्य जन-कल्याण और भटके हुए मन को सही दिशा देना होता है।
आज के आधुनिक समाज की स्थिति पर तार्किक दृष्टिकोण रखते हुए देवी जी ने कहा कि आज का मनुष्य तकनीकी और आर्थिक रूप से समृद्ध है, लेकिन भीतर से उतना ही अकेला और तनावग्रस्त है। उन्होंने मुख्य सूत्र देते हुए समझाया कि हमारे शरीर का रक्षण तो यह भौतिक जगत कर सकता है, लेकिन अशांत मन और बुद्धि की सुरक्षा का उपाय केवल 'आध्यात्मिक जगत' के पास है। भागवत श्रीकृष्ण का साक्षात वाङ्मय स्वरूप है, जो हमें विपरीत परिस्थितियों में भी राजा परीक्षित और भक्त प्रह्लाद की तरह मानसिक संतुलन बनाए रखना सिखाता है।
प्रवचन के मध्य पूजनीया देवी जी के मधुर संकीर्तन "श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा..." पर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। प्रथम दिन शौनकादिक ऋषियों के प्रसंग द्वारा कोरे ज्ञान के स्थान पर 'विवेक' के महत्व को समझाया गया कि ज्ञान मनुष्य को केवल बुद्धिमान बना सकता है, लेकिन विवेक उसे समझदार बनाता है।दिव्य प्रसंग के विश्राम पर जब श्रीमद्भागवत महापुराण की भव्य आरती उतारी गई, तो संपूर्ण आशीष वाटिका परिसर शंखध्वनि, करतल ध्वनि और दिव्य तरंगों से सरावोर हो उठा। महाआरती के इस अलौकिक क्षण में उपस्थित हर एक श्रद्धालु का हृदय परम शांति और दिव्य आनंद की अनुभूति से भर गया।
भागवत महापुराण प्रवचन श्रृंखला प्रतिदिन सायंकाल 7:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक आशीष वाटिका, हिरण मगरी सेक्टर-13, उदयपुर में आयोजित की जा रही है और यह 25 मई तक जारी रहेगी।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube