न्याय और कानून की गहन समझ से ही बनते हैं सफल अधिवक्ता: श्री हरि बोरकर* *मूट कोर्ट न्यायिक जीवन का प्रथम कदम: श्री मनन कुमार मिश्रा*
By Goapl Gupta ·
22 Feb 2026 ·
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*न्याय और कानून की गहन समझ से ही बनते हैं सफल अधिवक्ता: श्री हरि बोरकर*
*मूट कोर्ट न्यायिक जीवन का प्रथम कदम: श्री मनन कुमार मिश्रा*
Udaipur । विधि महाविद्यालय मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के द्वारा आयोजित FIAT JUSTITIA राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह आरएनटी ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कुलगुरु एवं विधि संकाय के अधिष्ठाता ने विधि विद्यार्थियों को न्याय, कानून और वकालत की गरिमा से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश दिए।
मुख्य अतिथि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य श्री मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि मूट कोर्ट विधि विद्यार्थियों के लिए न्यायालयीन जीवन का प्रथम कदम है। यह विद्यार्थियों को न्यायालय की गरिमा, तर्क प्रस्तुत करने की कला और अधिवक्ता के दायित्वों को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट विधि शिक्षा की प्रयोगशाला है, जहां विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, शोध कौशल और प्रस्तुतीकरण की क्षमता का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय न्याय का मंदिर है और अधिवक्ता का दायित्व है कि वह पूर्ण तैयारी, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ न्यायालय में उपस्थित हो। अधिवक्ता का कार्य केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और मानवता की स्थापना करना भी है। उन्होंने कहा कि एक अच्छी बहस गहन अध्ययन और मजबूत शोध पर आधारित होती है, क्योंकि अधिवक्ता की शक्ति उसका ज्ञान और तर्क होता है।
उन्होंने विधि विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वकालत के प्रारंभिक चरण में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे अनुभव की कमी, संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन का अभाव। लेकिन यही समय सीखने और स्वयं को मजबूत बनाने का अवसर होता है। जो विद्यार्थी इस समय का सही उपयोग करते हैं, वही भविष्य में सफल और प्रतिष्ठित अधिवक्ता बनते हैं।
विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के संगठन सचिव श्री हरि बोरकर ने कहा कि न्याय और कानून की गहन समझ ही एक सफल अधिवक्ता की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विधि जानकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और विधि विद्यार्थियों ने ही समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के विधि छात्र ही भविष्य के मदन मोहन मालवीय और महात्मा गांधी बन सकते हैं, जो न्याय और सत्य के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि एक अधिवक्ता के लिए विधि का संपूर्ण ज्ञान, न्यायिक निर्णयों की समझ और प्रभावी प्रस्तुतीकरण क्षमता अत्यंत आवश्यक है। अधिवक्ता को न्यायालय में पूर्ण तैयारी के साथ उपस्थित होना चाहिए और कम शब्दों में सटीक एवं प्रभावी तर्क प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल कानून का पालन करने वाला ही नहीं, बल्कि कानून निर्माण में योगदान देने वाला बनने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में विधि के क्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आएंगी, इसलिए विद्यार्थियों को विधि का गहन अध्ययन करना चाहिए और तकनीक का सही उपयोग करना सीखना चाहिए।
इस अवसर पर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में न्याय, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को विधि के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
विधि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. आनंद पालीवाल ने कहा कि मूट कोर्ट विधि विद्यार्थियों के लिए जीवन की प्रयोगशाला के समान है, जहां वे न्यायिक प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझते हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थी विधिक तकनीकों को सीखते हैं और न्यायालयीन कार्यप्रणाली का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट विद्यार्थियों में बहस की कला, तार्किक सोच और प्रभावी प्रस्तुतीकरण क्षमता का विकास करता है और उन्हें भविष्य में एक सक्षम एवं जिम्मेदार अधिवक्ता बनने के लिए तैयार करता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें न्यायिक प्रणाली की गहराई से समझ प्रदान करते हैं, जिससे वे भविष्य में न्याय व्यवस्था के सशक्त स्तंभ बन सकें।
कार्यक्रम में विज्ञान महाविद्यालय के डीन प्रो. सीपी जैन, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीसी गर्ग, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश कुमार बार्बर, विधि महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ.राजश्री चौधरी, डॉ. शिल्पा सेठ, स्पोर्ट्स बोर्ड के सचिव डॉ. बी.आर.पटेल, डॉ. पी. डी. नागदा, डॉ. भाविक पानेरी, डॉ. स्नेहा सिंह. डॉ. कल्पेश निकावत, डॉ. पंकज शंकर लाल मीना, डॉ. हँसा जोशी इत्यादि उपस्थित थे l कार्यक्रम के अंत विधि महाविद्यालय कि सह-अधिष्ठाता ने डॉ शिल्पा सेठ ने कार्यक्रम में आये हुए अतिथियों और प्रत्यक्ष और कार्यक्रम प्रत्यक्ष रूप से भाग ले रहे सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।