यूजीसी मुद्दे पर बलरामपुर में गरमाई राजनीति, बैठक में उठी आरक्षण और पारदर्शिता की मांग
By Goapl Gupta ·
22 Feb 2026 ·
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यूजीसी मुद्दे पर बलरामपुर में गरमाई राजनीति, बैठक में उठी आरक्षण और पारदर्शिता की मांग
दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश बलरामपुर सम्वाददाता। यूजीसी से जुड़े हालिया निर्णयों को लेकर जिले में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में भविष्यवक्ता अधिवेश अग्निवेश उपाध्याय के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूजीसी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
बैठक के दौरान शांति प्रभु मिश्र, महंत हरिहर हरिहरेश्वर महादेव मंदिर थाना हरैया , ने कहा कि यूजीसी एक्ट का प्रावधान कानून के रूप में लागू है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों में जातीय विभाजन पैदा करने की कोशिश चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कुछ नेता खुलकर यूजीसी का विरोध कर रहे हैं, तो अन्य वर्गों के नेता चुप क्यों हैं।
वहीं कुँवर सुमेर सिंह, प्रधानमंत्री जन कल्याणकारी योजना जागरूकता अभियान के राष्ट्रीय सचिव, ने कहा कि यदि सरकार यूजीसी कानून लागू करती है तो उसे सभी जातियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं होता, तो कानून को वापस लेकर आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, ताकि देश के भविष्य का समग्र विकास हो सके।
इस मौके पर अग्निवेश उपाध्याय ने स्पष्ट रूप से “यूजीसी रोलबैक” आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि वे धरना दे रहे छात्रों और सामाजिक संगठनों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी बड़े फैसले में पारदर्शिता, व्यापक संवाद और विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि होने चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी नीति से छात्रों, शोधार्थियों या शिक्षकों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ता है, तो सरकार और संबंधित संस्थाओं को उस पर पुनर्विचार करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध को अधिकार बताते हुए उन्होंने यूजीसी और सरकार से सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की।
बैठक के बाद क्षेत्र में यूजीसी को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।