अगर बच्चों में भगवान की पूजा विधि के संस्कार नहीं डालेंगे तो कल मन्दिरों में केवल भगवान रहेंगे, पूजा करने वाला कोई नहीं होगा: आचार्यश्री विहर्षसागरजी महाराज
By Goapl Gupta ·
01 Mar 2026 ·
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अगर बच्चों में भगवान की पूजा विधि के संस्कार नहीं डालेंगे तो कल मन्दिरों में केवल भगवान रहेंगे, पूजा करने वाला कोई नहीं होगा: आचार्यश्री विहर्षसागरजी महाराज
उदयपुर। आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में विराजित आचार्यश्री विहर्षसागरजी महाराज ने रविवार को आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि अगर आप जीवन मे ंदान-पुण्य करते रहोंगे तो धन की कभी भी कमी नहीं आएगी। दान कई प्रकार के होते हैं, लेकिन जैनों के लिए साधु-सन्तों के लिए किया जाने वाला आहार दान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। साधु सन्तों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है। कई बच्चों ने अपने माँ बाप से अच्छे संस्कार लिये है जो स्वयं की कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान पुण्य में खर्च कर देते हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि माता- पिता को चाहिये कि वह अपने बच्चों में धार्मिक संस्कार का निर्माण करें। बच्चों से अभिषेक करवाये, मंदिर बनवाये, आहारचर्या करने के उनमें संस्कार डालें। अगर आप बच्चों को यह सभी संस्कार नहीं सिखा रहे हैं तो आप बच्चों और उनके भविष्य के साथ अन्याय कर रहे हैं। क्योंकि आज के बच्चो में कल का भविष्य छिपा हुआ है। अगर हम बच्चों में इस तरह के धार्मिक संस्कारों का निर्माण नहीं करेंगे तो कल संतों को कौन आहारचर्या करवाएगा, मन्दिर में कौन पूजा- अभिषेक करेगा। याद रखना यह सब अगर हम नहीं करेंगे तो कल मन्दिरों में मूर्तियों में केवल भगवान रहेंगे, पूजा करने वाला कोई नहीं होगा।
यदि एक और एक मिल कर अगर ग्यारह हो जाते हैं तो वह संगठन बन जाता है। यदि एक से एक मिल कर एक रह जाए तो वह प्रेम हो जाता है। यदि एक और एक मिल कर एक दूसरे के विरूद्ध खड़े हो जाएं तो वह राजनीति हो जाती है। यदि एक को एक में नहीं मिलने दिया जाए तो वह कूट नीति हो जाती है। हमें इस गण्ति को समझना होगा। कई्र बार हम जैन होकर भी अजैन लगते हैं। दुनियां हमें जैन समझती ही नहीं है क्योंकि हम नाम के बाद पहले गौत्र लगाते हैं और जैन बाद में लगाते हैं। आज जैन का जेन से मतभेद है। आज हमारा जैन समाज दिगम्बर, श्वेताम्बर, बीस पंथी, बारह पंथी में बंट गया है। हमारे इसी बंटने बंटाने के कारण हमारे कई तीर्थों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। अब समय आ गया है कि हम समझें। हमें अपने धम्र के लिए और कर्म के लिए जागना ही होगा, तभी जैन और जैन धर्म और हमारे तीर्थों का अस्तित्व बच पाएगा।
आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि इससे पूर्व प्रात:काल श्रीजी की शंतिधारा, पंचामृत अभिषेक जैसे मांगलिक आयोजन हुए। धर्मसभा के दौरान आचार्यश्री को शास्त्र भेंट, गुरूदेव का पाद प्रक्षालन के मांगलिक आयोजन हुए। इस दौरान अशोक शाह, मदन देवड़ा महावीर सिंघवी, सुरेश वखेरिया आदि उपस्थित रहे। सायंकाल भव्य आरती का आयोजन हुआ। धर्मसभा का संचालन ब्रह्मचारी वीणा दीदी ने किया।