रविवार को आचार्यश्री विहर्ष सागरजी महाराज का अवतरण दिवस एवं योगी धर्मवीर श्री 108 श्री विजयेशसागरजी महाराज का 15वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया जाएगा
By Goapl Gupta ·
07 Mar 2026 ·
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रविवार को आचार्यश्री विहर्ष सागरजी महाराज का अवतरण दिवस एवं योगी धर्मवीर श्री 108 श्री विजयेशसागरजी महाराज का 15वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया जाएगा
जो बच्चे अपने माता- पिता की सेवा नहीं करते, वह जीवन में कभी भी सुखी नहीं रह सकते: आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज
उदयपुर जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। श्री आदिनाथ भवन सेक्टर 11 उदयपुर में विराजमान आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में शनिवार को विघ्नहरण पाश्र्वनाथ विधान हुआ। ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि विधान के सौधर्म इन्द्र अशोक कुमार कोठारी, धनपति कुबेर राजेन्द्र कोठारी एवं यज्ञ नायक जितेन्द्र चौधरी रहे। विधान में उदयपुर शहर सहित मेवाड़-वागड़ सेकई श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ लिया। विधान में भक्ति-भाव में डूबे श्रावक- श्रविकाएं भक्ति नृत्य के साथ लगातार भगान पाश्र्वनाथ के जयकारे एवं गुरूदेव के जयकारे लगाते पूरा आदनिाथ भवन गूंजायमान करती रही। प्रात:कालीन वेला में मांगलिक आयोजनों के तहत शुक्रवार प्रात: श्रीजी की शांति धारा अभिषेक हुआ जिनके पुण्यार्जक भूपेन्द्र चौधरी परिवार रहे। । धर्मसभा में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री को शास्त्र भेंट एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन जैसे मांगलिक आयोजनों के पुण्यार्जक परिवार प्रवीरण कोठारी परिवार रहे। इस दौरान मदन देवड़ा, महावीर सिंघवी, अशोक शाह सुरेश वखेरिया, अशोक कोठारी, राजेंद्र कोठारी, भूपेंद्र जैन, मधु मदन चित्तौड़ा, पारस सिंघवी कैलाश चित्तौड़ा अर्जुन कोडीया आदि उपस्थित थे।
पारस चित्तौड़ा ने बताया कि रविवार को प्रात: 7.30 बजे आचार्यश्री के सानिध्य में महाशांतिधारा एवं 21 रसों से पंचामृत अभिषेक होगा। दोपहर 12 बजे से सकल दिगम्बर जैन समाज के सानिध्य में आदिनाथ भवन में मुख्य कार्यक्रम आचार्यश्री विहर्ष सागरजी महाराज का अवतरण दिवस एवं योगी धर्मवीर श्री 108 श्री विजयेशसागरजी महाराज का 15वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया जाएगा।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने बच्चों और माता-पिता के बीच संबंधों, परिवार में सम्मान और देखभाल के महत्व पर अपने उपदेश में माता-पिता के प्रति कृतज्ञता और सम्मान दिखाने के महत्व पर जोर देते हुए माता-पिता की भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने बच्चों को अपने माता- पिता के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हुए कहा कि माता- पिता जीवन की हर कठिनाईयों को सामना करते हुए बच्चों को पालते- पोषते ओर बड़ा करते हैं, और इस लायक बनाते हैं कि उन्हें कोई अच्छी नौकरी मिल जाए, वह कोई अच्छा व्यापार करे और अपने जीनव को खुशहाल बना सके। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, पढ़- लिख जाते हैं अेर उनकी शादी होने के बाद वह अपने माता- पिता से दूरियां बनाना शुरू कर देते हैं। आज की भाषा में कहें तो शादी के बाद अक्सर बच्चे कहते हैं कि वह बुजर्ग माता- पिता के साथ एडजस्ट नहीं हो पाते हैं। वह पुराने खयालात के हैं, उनमें आधुनिकता की समझ नहीं है। आज का जमाना अलग है, वो जमाना अलग है। ऐसी मानसिकता में जीने वाले बच्चों से आचार्यश्री ने कहा कि ऐसी मानसिकता हमारी सभ्यता और संस्कृति के विरूद्ध है। माता- पिता तो हमारे भगवान होते हैं और उनकी सेवा करना बच्चों का परम धर्म और मूल कर्तव्य है।
आचार्यश्री ने कहा कि दुनिया में बच्चों के लिए अगर सबसे बड़ा कोई धर्म या कर्तव्य है तो वह है अपने माता- पिता की सेवा करना और बुढ़ापे से मृत्यु पर्यन्त तक उनके साथ रह कर उनकी हर इच्छा की पूर्ति करना। जो बच्चे माता- पिता की सेवा नहीं करते, उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं, वह जीवन में न तो वह कभी सुखी नहीं रह पाते हैं और ना ही उनका परिवार सुखी रह पाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि बड़े होने और कमाने लगने के बाद बच्चों को अपने बुजुर्ग माता-पिता को मासिक खर्च के लिए पैसे देने चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे वे अपने बचपन में आपको दिया करते थे। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, स्नेह और सेवा से ही घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है। माता पिता कभी- कभी कुछ कहते भी नहीं है और बोलते भी नहीं है, लेकिन उनकी आंखें सब कुछ बयां कर देती है। बच्चों को उनकी आंखों में देख करउनकी भावनाओं को समझना चाहिये। माता- पता ने हमें जन्म दिया और पाल-पोस कर बड़ा किया। आपकी हर तमन्ना और इच्छाएं उन्होंने पूरी की तो वृद्धावस्था में उनकी हर इच्छा की पूर्ति करनरा आपकी जिम्मेदारी है। जो कुछ भी उन्होंने जीवन भर मेहनत मजूरी, नौकरी, व्यापार करके करके कमाया, जमीन- जायदाद, मकान, सम्पत्ति में से कुछ भी वह अपने साथ नहीं ले जाने वाले हैं, दुनिया से जब जाएंगे तब वह सब कुछ तुम्हारे लिए ही छोड़ जाएंगे।