शीतला माता के दर्शन करने चाकसू गए थे, जयपुर महाराजा माधो सिंह****
By Goapl Gupta ·
11 Mar 2026 ·
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*शीतला माता के दर्शन करने चाकसू गए थे, जयपुर महाराजा माधो सिंह****
एक दौर ऐसा भी आया था जब ढूंढाड़ शेखावाटी आदि में चेचक, बोदरी और लाल बुखार जैसे संक्रामक रोगों का दंश आम आदमी को झेलना पड़ा था । तब रोगों से बचाने वाली शीतला माता यानी शैडल माई पर ही विश्वास था ।
तत्कालीन महाराजा माधव सिंह द्वितीय भी लाल जी, गोपाल सिंह की चेचक ठीक होने पर पासवान रूप राय के साथ चाकसू में शील की डूंगरी में शीतला माता को धोक देने गए थे।
36 कोमों में मान्यता होने की वजह से माधो सिंह ने शील की डूंगरी मंदिर पर 36 खभों की बारादरी बनवाई थी। शीतला माता (शीतला अष्टमी)पर दो दिन की छुट्टी होती थी और एक दिन भट्ठियों का विश्राम रहता ।
रामनिवास बाग में गली बाजी(व्यंग्य )होती और घुड़सवार और तांगा दौड़ होती थी। शील की डूंगरी पर सवाई जयसिंह द्वितीय का भी जाने का उल्लेख मिलता है ।
आप पशु वध और मांस की बिक्री पर रोक रहती थी ।और शासन की तरफ से घरों में भोजन बनाने की रोक रहती थी ।
चाकसू में माता के भोग का थाल सिटी पैलेस से जाता था । माता के पुजारी कुम्हार घरों में पूजन के बर्तन दे जाते थे ।
एक रिकॉर्ड के मुताबिक जननी ड्योढ़ी से मिट्टी के बर्तन लाने वाली कुम्हारी माई को 10 आने दिए जाते थे।
ब्रह्मपुरी शीतला मंदिर में कुम्हार पुजारी माता को ठंडा व्यंजनों का भोग लगाते थे। 1861 की एक रिपोर्ट में शीतल को चेचक ठीक करने वाली माता माना जाता था। चाकसू की शील की डूंगरी में लांगड़ा बाबा की मान्यता थी।
पहले जिंदा बकरा, मुर्गा चढ़ाने का भी रिवाज था ।चाकसू के मेले एवं रामबाग आदि स्थानों पर ग्रामीण लोग अलगोजा गाते थे।
शीतला माता के बाहर पानी भरी मशक से छींटा लगाने के बाद जयकारा करते हुए दर्शन करते थे।
मोती सिंह जी एवं हनुमान बाबा के खील ,पतासे और बारादरी के पास लांगड़ा बाबा के प्रसाद चढ़ता था।
शीतला माता के मेले में महिलाएं सुहाग का सामान चूड़ी आदि खरीदती थी महिलाएं अपने हाथ पर अपना व अपने पति का नाम गुदवाती थी ।
नाम लिखने वाला कहता था ।थारा धणी को नाम बता , इस पर वह औरत शर्म से पल्लू को मूंह ढांप कर सहेली से नाम बताने का इशारा करती थी। वर्तमान दौर में ऐसा नहीं है।
रिपोर्टर *जनतंत्र की आवाज* राजस्थान
शिंभू सिंह शेखावत