रुक्मणि विवाह एवं उद्धव चरित्र सुनाया।* *बऊ धाम पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज का मिला सानिध्य।*
By Goapl Gupta ·
13 Apr 2026 ·
49 views
*रुक्मणि विवाह एवं उद्धव चरित्र सुनाया।*
*बऊ धाम पीठाधीश्वर ओमनाथ महाराज का मिला सानिध्य।*
लक्ष्मणगढ़। कस्बे के ढोलास स्थित कामधेनु गौशाला में आयोजित भागवत कथा के छठे दिन व्यासपीठ से पंडित परमेश्वर गुरुकृपा ने उद्धव चरित्र और रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उद्धव, कृष्ण के ज्ञानमार्गी मित्र थे, जो गोपियों के निश्छल प्रेम को समझने ब्रज गए पर भक्ति के कायल हो लौटे। रुक्मिणी ने शिशुपाल के बजाय कृष्ण को मन से वर लिया था, जिसके बाद कृष्ण ने उनका हरण कर विधिवत द्वारिका में विवाह किया।
उद्धव चरित्र और ब्रज गमन ज्ञान बनाम भक्ति का रूप है।
कृष्ण ने उद्धव को गोपियों के पास योग साधना का संदेश लेकर भेजा था, क्योंकि गोपियां कृष्ण के विरह में व्याकुल थीं। जब उद्धव ब्रज पहुंचे, तो गोपियों का कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण देखकर वे दंग रह गए। उद्धव का ज्ञान फीका पड़ गया और वे स्वयं गोपियों की भक्ति के भक्त बन गए। उन्होंने महसूस किया कि सच्चा प्रेम और समर्पण ही परमात्मा को पाने का साधन है।
रुक्मिणी (विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणि कृष्ण को पति रूप में चाहती थीं, लेकिन उनका भाई रुक्मी कृष्ण से शत्रुता के कारण विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था।
रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से कृष्ण को पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने स्वयं को ले जाने की विनती की।
कृष्ण, बलराम के साथ कुंडिनपुर पहुंचे और विवाह के दिन रुक्मिणी का हरण कर लिया। द्वारिका में रुक्मिणी और कृष्ण का विवाह हुआ और वे मुख्य पटरानी बनीं।
यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्चा प्रेम, संकल्प और भक्ति के सामने असत्य पराजित होता है।
ये दोनों प्रसंग भक्ति की शक्ति और भगवान के प्रेम के प्रति समर्पण का संदेश देते हैं।
इस अवसर पर *बऊ धाम पीठाधीश्वर ओमनाथ जी महाराज, डुडवा पीठाधीश्वर प्रवीण नाथ जी महाराज, खोरू की भर के पीठाधीश्वर मनमोहन जति महाराज, पूर्व शिक्षा उपनिदेशक रामनिवास शर्मा, सज्जन शर्मा, शिक्षाविद् भागीरथ शर्मा, लक्ष्मीकांत चूड़ीवाला, वरिष्ठ भाजपा नेता जयप्रकाश सरावगी, संजय जोशी, दिलीप नाउवाला, रतनसिंह गौड़, सी.ए हरिशंकर वर्मा, शिक्षाविद् सुखदेव पारीक, प्रताप सिंह, आनंद नैण, राकेश सैनी, नथमल सैनी, गिरधारीलाल जाजोदिया* आदि का सम्मान किया गया।