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एमपीयूएटी का 19वां दीक्षान्त समारोह संपन्न* *रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर अंकुश जरूरी* *निंतर बढ़ रहे हैं कैंसर रोगीः राज्यपाल*

By Gopal Gupta · 23 Dec 2025 · 22 views
एमपीयूएटी का 19वां दीक्षान्त समारोह संपन्न*

*रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर अंकुश जरूरी*

*निंतर बढ़ रहे हैं कैंसर रोगीः राज्यपाल*
*एमपीयूएटी का 19वां दीक्षान्त समारोह संपन्न*

*रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर अंकुश जरूरी*

*निंतर बढ़ रहे हैं कैंसर रोगीः राज्यपाल*

उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि फसलों में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग का खमियाजा मौजूदा पीढ़ी तो भुगत रही है लेकिन यहि क्रम जारी रहा तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। प्रदेश में कैंसर रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। अध्ययन और आंकड़े बताते हैं कि आने वाले समय में हर आठवां व्यक्ति कैंसर रोगी होगा। राज्यपाल बागडे सोमवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। रवीन्द्र नाथ मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल व अतिथियों ने कुल 1181 डिग्रीयां व 44 स्वर्ण पदक वितरित किए।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि 1980 तक हम अन्य देशों से अनाज आयात करते थे, लेकिन आज 140 करोड़ की आबादी के बावजूद अनाज के मामले में हम न केवल आत्मनिर्भर है बल्कि अतिरिक्त भंडार भी हमारे पास है। उन्होंने उपाधियां व मैडल लेने वाले छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि आने वाले 50-100 सालों में जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखकर उत्पादन को निरंतर बढ़ाना होगा। नम्रता, सभ्यता, बौद्धिक व शारीरिक क्षमता का भरपूर प्रयोग करते हुए युवा वैज्ञानिक ऐसी किस्में तैयार करे जिसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में हो। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है, लोग मुंहमांगा दाम देकर जैविक उत्पाद लेने को आतुर है।

उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में राजस्थान दूसरे स्थान पर है। गोधन भरपूर होने के बाद भी यांत्रिक उपयोग ज्यादा हो रहा है। हमारे यहां की मिठाइयां कंटेनर आकर विदेशों में जा रही है। देसी गाय का दूध ज्यादा गुणकारी है। हमें ऐसी देसी नस्लों के पशुओं के संरक्षण पर ध्यान देना होगा। इस विश्वविद्यालय का नाम जिन महाराणा प्रताप के नाम पर है, वह मेवाड़ के महापराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि स्वाधीनता के पहले सेनानी थे। दीक्षांत समारोह शिक्षा का समापन नहीं बल्कि विद्यार्थी जीवन का नवआरंभ है। कुल 44 स्वर्ण पदकों में से 27 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए है। छात्राओं को अवसर मिले तो वे हर कार्य को करने में सक्षम है। विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में मौलिक अनुसंधान करे और विशिष्ट फसलों के पेटेंट भी प्राप्त करे। यह जानकर अच्छा लगा है कि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों से 8 पेटेंट हासिल किये हैं। इसी तरह 57 उन्नत कृषि-तकनीक और 5 उन्नत फसल किस्में विकसित की हैं।
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के प्रेरणा से भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन प्रारंभ किया है। यह मिशन 2024-25 से 2030-31 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य तिलहन के उत्पादन को बढ़ाना और भारत को तेल बीजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस मिशन को सफल बनाने में विश्वविद्यालयों को महत्ती भूमिका निभानी होगी। जैविक एवं प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग है। कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में कार्य करना होगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री श्री करोड़ी लाल मीणा ने कहा कि डिग्री लेने वाले सभी युवा जवान हैं। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया था। सभी नौजवान कृषि छात्रों का जिम्मा है कि किसानों को सम्पन्न व खुशहाल बनाने की दिशा में काम करेंगे तो सही मायने में भगवान की सेवा मानी जाएगी। किसान आपदाओं के सामने कभी नतमस्तक नहीं होता बल्कि पूरी तन्मयता से मुकाबला करता है।
उन्होंने राष्ट्रपति अबुल कलाम आजाद का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी इमली के बीज बेचकर पढ़ाई करने वाले आजाद भारत के मिसाइलमैन बने। उन्होंने डिग्री व पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे ठान लें तो क्या कुछ नहीं कर सकते। देश के खाद्यान्न उत्पादन में पिछले 10 वर्षों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2015-16 में जहां उत्पादन 251.54 मिलियन टन था वो अब 106 मिलियन टन बढ़कर वर्ष 2024-25 में 357.73 मिलियन टन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में तीव्र प्रगति का यह प्रमाण है। आज का भारत स्टार्ट-अप का भारत है और कृषि स्टार्ट-अप इसमें तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। छात्र-छात्राओं के लिए एग्री-बिजनेस इन्क्यूबेशन प्रोग्राम। मूल्य संवर्द्धन और फूड प्रोसेसिंग में निवेश के नए अवसर है। सरकार का उद्देश्य है कि आप नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।
आरंभ में अनुसंधान निदेशक डॉं. अरविन्द वर्मा ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। उन्होंने विगत 1 वर्ष में अर्जित उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 05 पेटेंट एवं डिजाइन पंजीकरण अर्जित किये। यह विश्वविद्यालय गत वर्ष अभिनव शोध के आधार पर अब तक कुल 57 पेटेंट एवं डिजाइन पंजीकरण अर्जित कर चुका है। विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में विश्वविद्यालय के 2 वैज्ञानिक डॉ. एन.एल. पंवार एवं डॉ. विनोद सहारण सूचीबद्ध हुए। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, पूर्व कुलपति, प्रबंध मंडल व अकादमिक परिषद के सदस्यगण मौजूद थे। समारोह में प्रबंध मंडल के सदस्य डॉ सुरेश धाकड़, माननीय विधायक, बेगू, चितौड़, डॉ. कविता जोशी, डॉ. वी. डी मुद्गल, डॉ. सुरेंद्र कोठारी, ई. सुहास मनोहर, सुश्री दर्शना गुप्ता, एमपीयूएटी के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, कुलसचिव अशोक कुमार एसओसी मेंमर, डीन, डायरेक्टर, समारोह समन्यवयक डॉ. लोकेश गुप्ता एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. राम हरि मीणा उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती डॉ. विशाखा बंसल ने किया।
*मुस्कान को कुलाधिपति एवं वत्सला को कुलगुरु स्वर्ण पदक*
माननीय राज्यपाल एवं अतिथियों ने समारोह के दौरान कृषि, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, सामुदायिक विज्ञान, डेयरी व खाद्य प्रौद्योगिकी एवं मत्स्य पालन सहित विभिन्न संकायों में कुल 1181 उपाधियां और 44 स्वर्ण पदक प्रदान किए। स्वर्ण पदक लेने में छात्राओं का पलड़ा भारी रहा। स्नातक, निष्णात एवं विद्या वाचस्पति में कुल 17 छात्रों को जबकि 27 छात्राओं को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक विज्ञान निष्णात (सामुदायिक विज्ञान) खाद्य एवं पोषण मुस्कान को दिया गया जबकि इसी वर्ष से आरंभ हुआ कुलगुरु स्वर्ण पदक विज्ञान स्नातक (ऑनर्स) कृषि वत्सला वशिष्ठ को दिया गया। जैन इरीगेशन स्वर्ण पदक प्रौद्योगिकी स्नातक (कृषि अभियांत्रिकी) आदित्य ओझा को, फूल सिंह राठौड़़ मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रौद्योगिकी स्नातक (कृषि अभियांत्रिकी) माही गुप्ता, ब्रिगेडियर अनिल अदल खां स्वर्ण पदक दीपांशा कुमावत, किरण कुमावत व लांजेकर प्रणय राजेन्द्र को दिया गया।
इसके अलावा वत्सला वशिष्ठ, राजवर्धन सिंह सांगदेवोत, अंकित कुमावत, ध्रुव सिंह तोमर, दीपक लोहार, उज्ज्वला धुलिया, सौरभ सूरा, मुकुन्द पुरोहित, सुमित प्रजापत, अंकित कुमावत, नमिता अग्रवाल, कनिष्का टांक, दिशा साहु व अनिल सिंह शेखावत को भी स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
स्नातक स्तर पर कृषि संकाय में राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर, कृषि महाविद्यालय भीलवाड़ा, आर.एन.टी. कृषि महाविद्यालय कपासन, श्री गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय बांसवाड़ा एवं कृषि महाविद्यालय डूंगरपुर के 266 छात्र एवं 114 छात्राओं सहित कुल 380 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गई। इसी प्रकार अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में 384, सामुदायिक विज्ञान संकाय में 67, डेयरी व खाद्य विज्ञान संकाय में 69 व मात्स्यकी विज्ञान संकाय में 34 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गई।
इसी प्रकार निष्णात (स्नातकोत्तर) में कृषि संकाय में 108, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में 35, सामुदायिक विज्ञान संकाय में 1़9 व डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी संकाय में 9 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गई। विद्या वाचस्पति में कृषि संकाय में 49 अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में 15, गृह विज्ञान संकाय में 7 एवं सामुदायिक विज्ञान संकाय में 5 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गई।

*पांच किस्मों का लोकार्पण*

माननीय राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पांच उन्नत किस्मों- प्रताप मूंगफली-4, प्रताप संकर मक्का-6, प्रताप ज्वार-2510, प्रताप ईसबगोल-1 एवं प्रताप असालिया-1 का लोकार्पण किया गया।

*विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या को खाद्य*

*आपूर्ति कर सकता है भारतः प्रो. शर्मा*

*दीक्षांत अतिथि प्रो. शर्मा ने दी अहम् जानकारी अतिथि प्रो. भगवती प्रसाद वर्मा अध्यक्ष, यूनेस्को द्वारा संचालित महात्मा गांधी शांति व विकास संस्थान एवं पूर्व कुलपति गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा (उ.प्र.) ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश में घटती हरीतिमा, तेजी से विलोपित हो रही जैव विविधता, आधुनिक कीटनाशी रसायनों से पारिस्थितिकी तंत्र का सुकोमल संतुलन खत्म हो रहा है। जमीन को निरंतर उर्वर बनाने वाले केंचुए गायब हो गए। हमें गंभीरतापूर्वक इस पर मनन करना होगा।
उन्होंने कहा भारत विश्व की सर्वाधिक 19 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि से युक्त व विश्व का दूसरा सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल वाला देश है। हमारे देश से प्रतिवर्ष जो 20 करोड़ हेक्टेयर मीटर जल बह कर समुद्र में चला जाता है, उसका यथोचित उपयोग करके हम अपने सिंचित क्षेत्र को 6.7 हेक्टेयर के वर्तमान स्तर से, 18 करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ा सकते हैं। ऐसा करके देश विश्व की नंबर एक की खाद्य शक्ति बन कर विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है। देश में उपलब्ध जलराशि से अपनी सिंचाई क्षमता बढ़ा कर देश का कृषि उत्पादन तीन गुने से अधिक कर लिए जाने पर देश के सकल घरेलू उपज में कृषि का योगदान वर्तमान रू. 120 लाख करोड़ से बढ़ा कर 400 लाख करोड़ रुपये तुल्य किया जा सकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करके हम विश्व का भरण-पोषण कने में समर्थ देश के रूप में अपने पारम्परिक नाम भारत को पुनः सार्थक कर सकते हैं। किसानों के लिए गेहूं, चावल, टमाटर आदि उपजों की सीधी बिक्री से समुचित आय संभव नहीं है। कृषि उपजों के मूल्य सवंर्द्धित उत्पादों अर्थात् गेहूं के स्थान पर उससे आटा, मैदा, सूजी, केक पेस्ट्री जैसे मूल्य संवर्द्धित उत्पादों के विक्रय से ही कृषि को किसान के लिये लाभदायक बनाया जा सकेगा। मधुमक्खियाँ और कीट-पतंग आदि आधा किमी. की परिधि से आगे नहीं जा सकते हैं। कुछ पक्षी भी 2-3 किमी. की परिधि से आगे नहीं जा पाते हैं। इसलिये, ऐसी प्रत्येक आधा किमी. से 2 किमी. की परिधि में कीट-पतंगों एवं पक्षियों को आवास व आहार के लिए हर मौसम में पुष्प व फल देने वाली सभी पारम्परिक पादप प्रजातियों का होना व उनका सतत् संरक्षण परम-आवश्यक है। एक ही या सीमित प्रजाति के पेड़-पौधे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण नहीं कर पायेंगे। उदाहरण के तौर पर केवल नीम का ही पौधारोपण करने पर नीम में पुष्प मात्र 15-20 दिन रहते हैं व उनमें निम्बोली भी 15-20 दिन ही रहती है। उसके बाद कई किमी. तक केवल नीम की बहुलता की दशा में, पराग व फल की खोज में कीट-पतंग व फल-भक्षी पक्षी भूख से ही मर जाते हैं।

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