“नृत्य, भाव और लय का अद्भुत समागम—भव्य नृत्यमय प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ कुंभा समारोह”
By Goapl Gupta ·
29 Mar 2026 ·
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“नृत्य, भाव और लय का अद्भुत समागम—भव्य नृत्यमय प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ कुंभा समारोह”
उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल। महाराणा कुंभा संगीत समारोह में रविवार को रेलवे ट्रेनिंग स्कूल, उदयपुर में आयोजन के तृतीय एवं अंतिम दिवस पर संगीत एवं नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित समारोह का समापन अत्यंत गरिमामय एवं सांस्कृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण वातावरण में हुआ।
समारोह के तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में ओडिसी नृत्य की प्रख्यात नृत्यांगना सुश्री वाणी माधव एवं समूह ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत मंगलाचरण से की, जिसके माध्यम से देवी काली की वंदना प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात “ऋतु नायिका” शीर्षक के अंतर्गत वसंत एवं ग्रीष्म ऋतु की भावाभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रकृति के परिवर्तन, नायिका के मनोभावों एवं विरह तथा संयोग की स्थितियों को अत्यंत सजीव रूप में दर्शाया गया। नृत्य के माध्यम से ऋतु परिवर्तन के साथ भावों की विविधता एवं नायिका की अंतर्मन की अनुभूतियों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
आगे “दशावतार” की प्रस्तुति में भगवान विष्णु के दस अवतारों का सुंदर चित्रण किया गया, जिसमें प्रत्येक अवतार के माध्यम से धर्म की स्थापना एवं सृष्टि के संतुलन की अवधारणा को सजीव रूप दिया गया। यह प्रस्तुति कवि जयदेव रचित ‘गीत गोविंद’ पर आधारित रही। अंत में “भजामि विंध्यवासिनी” के माध्यम से देवी शक्ति की स्तुति प्रस्तुत की गई, जिसमें देवी के विविध रूपों, शक्ति एवं करुणा का प्रभावशाली चित्रण किया गया। संपूर्ण प्रस्तुति में नृत्य, भाव एवं संगीत का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इस प्रस्तुति में वाणी माधव के साथ नेहा भारद्वाज, आकांक्षा महाराणा, जाह्नवी गांधी एवं कौशिकी दास ने सहभागिता निभाई। मर्दला पर प्रफुल्ल मंगराज, गायन में प्रशांत कुमार बेहरा, बांसुरी पर धीरज कुमार पांडे तथा वायलिन पर गोपीनाथ स्वैन ने सजीव संगीत संगत प्रदान की।
द्वितीय सत्र में कथक कलाकार विश्वदीप एवं उनके समूह द्वारा एक विशेष नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसका विषय कथक की परंपरागत यात्रा को आदिकाल से वर्तमान समय तक दर्शाना रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ भगवान शिव की आराधना “डमरू हर कर बाजे” से किया गया। इसके पश्चात कथावाचन शैली के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं — माखन चोरी एवं विश्वरूप दर्शन — का सजीव मंचन किया गया। अगले चरण में मुगल काल के प्रभाव को दर्शाते हुए “छाप तिलक” जैसी रचना प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात जयपुर घराने एवं राजस्थान की लोक संस्कृति से प्रेरित प्रस्तुति में पारंपरिक एवं लोक तत्वों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
अंतिम प्रस्तुति में भगवान कृष्ण की लीलाओं — कालियामर्दन एवं गोवर्धन लीला — के माध्यम से जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। उनके नृत्य में लयकारी, पद संचालन एवं सामूहिक समन्वय का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। प्रस्तुति में विश्वदीप के साथ श्रीमती रुचिका बग्गा, सूरज कुमार, सुश्री आस्था गुप्ता, सुश्री आंचल शर्मा एवं सुश्री धृति शर्मा ने सहभागिता निभाई। तबले पर प्रदीप कुमार पाठक एवं साबिर खान, गायन एवं हारमोनियम पर जय दाधीच, सारंगी पर एजाज़ खान, सितार पर मेहराब हुसैन तथा पढ़ंत में बापी डे ने संगत प्रदान की।
तीन दिवसीय महाराणा कुंभा संगीत समारोह का तृतीय दिवस भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अत्यंत सफल एवं स्मरणीय रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ जितेंद्र कुमार तायलिया- रहे। अध्यक्ष डॉ. प्रेम भण्डारी, संस्था सचिव मनोज मूर्डिया, कार्यकारी अध्यक्ष सुशील दशोरा, उपाध्यक्ष डॉ पुष्पा कोठारी, उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र सिंह हिरण , परवेज़ जाल,डॉ. पामिल मोदी, दिनेश माथुर, विजय धांधरा, डॉ रेखा मेनारिया, उर्वशी सिंघवी,ने सभी कलाकारों एवं अतिथि का शॉल व उपरणा ओढ़ा कर पारम्परिक रूप से स्वागत किया।।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. लोकेश जैन एवं विदूषी जैन ने किया