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महरौली बना ‘राममय’: 1.70 करोड़ जप के साथ आस्था का विराट संगम 357 साधकों की सामूहिक साधना ने रचा कीर्तिमान, अनुशासन और भक्ति की अनूठी मिसाल

By Goapl Gupta · 07 Apr 2026 · 15 views
महरौली बना ‘राममय’: 1.70 करोड़ जप के साथ आस्था का विराट संगम
357 साधकों की सामूहिक साधना ने रचा कीर्तिमान, अनुशासन और भक्ति की अनूठी मिसाल

रींगस/सीकर। सीकर जिले के महरौली गांव में मंगलवार को संगीतमय श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ के समापन पर आयोजित राम नाम जप महायज्ञ ने आस्था का नया अध्याय लिख दिया। 1 करोड़ 70 लाख ‘राम नाम’ जप के साथ यह आयोजन पूरे क्षेत्र में भक्ति, अनुशासन और सामूहिक साधना का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा।

सुबह 5 बजे शुरू हुए महायज्ञ में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ‘राम नाम’ की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया और गांव ‘राममय’ नजर आया। सुबह से ही आयोजन स्थल पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जो समय के साथ विशाल जनसमूह में बदल गई।

वृंदावन धाम रामकुटी के संत प्रहलाद जी महाराज के सानिध्य में सामूहिक जप आरंभ हुआ। अनुशासन बनाए रखने के लिए तय समय के बाद प्रवेश बंद कर दिया गया, जिससे आयोजन में अनुशासन की अलग ही छाप देखने को मिली।

सामूहिक साधना में अनुशासन की मिसाल
जप एक-एक घंटे के सत्रों में लगातार चलता रहा, बीच में 30 मिनट का मध्यांतर रखा गया। दोपहर 12 बजे तक 245 महिलाओं और 112 पुरुषों सहित कुल 357 साधकों ने पूर्ण एकाग्रता के साथ एक-एक माला जपते हुए सामूहिक रूप से 1.70 करोड़ जप का लक्ष्य हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

भक्ति में डूबा माहौल, हर चेहरा भाव-विभोर
दीपों की रोशनी, भजनों की मधुर ध्वनि और साधकों की एकाग्रता ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक साधना का केंद्र बना दिया। भक्ति और अनुशासन का यह संगम हर सहभागी को भाव-विभोर करता नजर आया।

राम नाम जप से मिलता है जीवन में संतुलन
संत प्रहलाद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि राम नाम जप जीवन में शांति, अनुशासन और सकारात्मकता का सबसे सरल मार्ग है। उन्होंने युवाओं से नशामुक्ति, सदाचार और धर्ममय जीवन अपनाने का आह्वान किया।

पूर्व सैनिक की स्मृति में आयोजन
आयोजन की जानकारी देते हुए शंकर सिंह फौजी ने बताया कि यह महायज्ञ पूर्व सैनिक स्वर्गीय विशन सिंह शेखावत की स्मृति में उनके परिजनों द्वारा आयोजित किया गया। अंत में सभी साधकों के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई।

महरौली का यह आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों का मजबूत संदेश देकर क्षेत्र में नई प्रेरणा छोड़ गया।

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