ज्ञात - अज्ञात ने रची सवर्ण हत्त्या या आरक्षण की रचना --
By Goapl Gupta ·
06 Feb 2026 ·
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ज्ञात - अज्ञात ने रची सवर्ण हत्त्या या आरक्षण की रचना -- कैलाश चंद्र कौशिक जयपुर! नई दिल्ली से आरक्षण क्रांति की मशाल देश में क्या आग लगायेगी , सोशल मीडिया पर अनवरत पर संचालित हुबहु है--- *महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू* के आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट आया कि *हमारी सरकार दलितों पिछड़ों और वंचितों के लिए कार्य कर रही है....*
*माननीय राष्ट्रपति महोदया आप इस राष्ट्र यानी भारत की प्रथम नागरिक है...* और जिस संवैधानिक पद पर आप विराजमान है उस पद के लिए ये *पक्षपातपूर्ण बयान* उचित नहीं....क्योंकि दलितों पिछड़ों वंचितों के अलावा सामान्य वर्ग का भी ये देश और उसका योगदान भी हर प्रकार से है......
सरकार की तरफ से उन्हें कोई विशेष सहयोग या दर्ज़ा भले न मिला हो लेकिन सामान्य वर्ग ने अपना सर्वस्व राष्ट्र को अवश्य दिया..
*आरक्षण की सुविधा के 78 साल बाद भी पिछड़ा अभी तक पिछड़ा है....और वंचित सारी सुविधाएं सरकार से मिलने के बाद भी वंचित है???तो इसमें गलती या तो सिस्टम की है या दलितों पिछड़ों और वंचितों की है...* या ये सिर्फ विक्टिम कार्ड है या फिर मानसिक अक्षमता...क्योंकि कोई तो कारण होगा???? *जब sc 15% st 7.5% OBC 27% वो अभी आजादी के बाद 78 साल बाद भी वहीं है जहां 1947 में था तो कुछ तो गड़बड़ है....85% प्रतिशत पर 15% अत्याचार कर रहे... शोषण कर रहे है....ये सिर्फ एक विचारधारा बना दी गई है...या क्या है,???*
जबकि धरातल पर सामान्य वर्ग सिर्फ अपनी मेहनत के बलबूते खड़ा है.... है कोई सरकार जो ये कह सके कि उसने उन्मुक्त भाव से सामाजिक समानता बनाए रखने के लिए आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश की....या सामान्य वर्ग को विशेषाधिकार दिए है.....
सामान्य वर्ग के लिए 10% EWS भी सशर्त लागू किया...EWS पर सभी जातियों का हक है...क्या बाकी आरक्षण प्रतिशत पर किसी भी सरकार ने कोई मानक निर्धारित किया....सिर्फ जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण की सुविधा शुरू....फिर सशर्त 10%EWS का प्रपंच क्यों...10%
भी सिर्फ सामान्य वर्ग होने पर ही मिलना चाहिए....फिर शर्ते क्यों लगाई...यही आर्थिक मानक आप sc st obc वंचित आरक्षण पर क्यों नहीं लगा रहे कि जो इस क्राइटेरिया में आयेगा उसी को आरक्षण मिलेगा....
सिर्फ *वोट बैंक की राजनीति* है....*यूजीसी के नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई...* लेकिन जब सवर्ण सड़कों पर उतरा तो मजाल है किसी पार्टी के नेता ने समर्थन दिया हो...किसी मीडिया हाउस ने दिया हो...हम अपनी लड़ाई लड़े...उसमें भी हमने कहा कि नियम बनाना है बनाओ...
लेकिन सामान्य वर्ग को भी अपनी बात रखने का मौका दीजिए...क्योंकि तभी समानता का नियम लागू होगा....लेकिन कुछ दूषित मानसिकता के पार्टी पढ़े लिखे प्रवक्ता अनपढ़ों की तरह बात कर रहे है...
*हमने कभी किसी का दोहन नहीं किया...* जब बांग्लादेश में मुस्लिमों द्वारा *दलित दीपू दास* जिंदा जलाया जाता है...तब किसी की आवाज नहीं निकलती दीपू के लिए....लेकिन इनको 500 साल से सवर्ण प्रताड़ित कर रहा है ??? अरे जाहिलों अत्याचार , लूट खसोट तो की मुगलों ने, अंग्रेजों ने..राजस्थान के कन्हैया जो तेली समाज से थे...उनकी हत्या हो जाती है। हत्यारे फेसबुक पर खुलेआम स्टेटमेंट दे रहे है। फिर भी कोर्ट सबूतों के अभाव में उन्हें छोड़ देती है...कोई आवाज नहीं उठाता....फिर भी सामान्य वर्ग शोषण करता है???? दिल्ली बम धमाके में मुस्लिम डॉक्टर्स और लोग शामिल थे पर्याप्त सबूत के बावजूद रिहा हो जाते है....लेकिन *विष्णु तिवारी* को 20 सालों तक झूठे sc,st केस में जेल में रखा जाता है जिससे उनका परिवार और जीवन तबाह हो जाता है...और 20 साल बाद वो कोर्ट विष्णु तिवारी को निर्दोष मानती है....तो क्या झूठे केस में विष्णु तिवारी को फसाने वाले को 10 सालों की भी सजा का प्रावधान है....उत्तर है नहीं......ये प्रश्न चिह्न न्यायपालिका की कार्यशैली पर भी है कि क्या जाति और धर्म देखकर आरोप सिद्ध होंगे????
*बस मेरी यही विनती है कि संवैधानिक पदों संस्थाओं और न्यायपालिका के उच्च पदों पर बैठे माननीय लोगों से की जाति आधार पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से बचिए....* क्योंकि जो नहीं मांगता वो सहनशील है....यदि वो भी औरों की तरह सिर्फ छीनने में विश्वास करने लगे....तो समाज में अराजकता का प्रचंड रूप देखने को मिलेगा....क्योंकि जिसको ये विश्वास हो जाए कि किसी भी सूरत में हमे मरना ही है....तो लड़ के मरो....ताकि शौर्य और वीरगति तो मिलेगी...भले देश न माने उसे त्याग....लेकिन उसका समाज उसके लोग तो मानेंगे....