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लेखक और संपादक अपने धर्म से गिरते हैं तो कुछ नहीं बचता- बलराम

By Goapl Gupta · 10 Feb 2026 · 12 views
लेखक और संपादक अपने धर्म से गिरते हैं तो कुछ नहीं बचता- बलराम
‘’समकालीन भारतीय साहित्य’’ के संपादक बलराम का सम्मान
जयपुर, 10 फरवरी। वरिष्ठ कथाकार और साहित्य अकादेमी दिल्ली की पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य के यशस्वी संपादक बलराम ने कहा है कि एक उत्तरदायी संपादक और लेखक का धर्म है कि वह अच्छे कामों को सराहे और कमियों की ओर ध्यान दिलाए। पहली बार विश्व पुस्तक मेले में प्रवेश नि:शुल्क किया जिससे पाठकों की संख्या और पुस्तकों की बिक्री बढ़ी लेकिन साहित्य संस्कृति, पुस्तक और लेखकों के पुरस्कारों को रोकना सही नहीं था। साहित्य से जुड़े मामलों को नहीं रोका जाना चाहिए। उन्हें पुन; शुरू करना चाहिए। साहित्यकार और संपादक जब अपने धर्म से गिरते हैं तो ना लेखक और ना संपादक बचता है। उन्होने कहा कि लेखकों द्वारा साहित्य पुरस्कारों को लौटाना भी सही कदम नहीं था। यह अपनी ही संस्था और निर्णायकों का अपमान है।
बलराम राही सहयोग संस्थान और प्रौढ़ शिक्षण समिति के तत्वावधान में 75 वें वर्ष पर अपने अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। इससे पूर्व फारूक आफरीदी, नन्द भारद्वाज, दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, प्रबोध गोविल और राजेंद्र बोड़ा ने उन्हे शाल ओढ़ाकर और प्रशस्ति पत्र भेंट कर बलराम का अभिनंदन किया।






वरिष्ठ उपन्यासकर प्रबोध गोविल ने कहा कि बलराम की विशेषता रही कि वे अपने कार्यों के प्रति सदैव निष्पक्ष, निर्णायक और विश्वसनीय रहे। कई बार वे अपने ही विरुद्ध रहे। साहित्यकार के लिए तटस्थता जीवन मूल्यों को समझने की दृष्टि, व्यक्तियों को पहचानने की समझ उसे बड़ा बनाती है।
सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि ऐसा समय हैं जब मूर्खता और अवैज्ञानिकता अशिष्टता, अशालीनता जड़ता को जब सेलिब्रेट किया जाता है और विद्वत्ता, शालीनता, ज्ञान का उपहास कर प्रसन्नता का अनुभव किया जाता है तब एक सक्रिय और समाज के प्रति समर्पित रचनाकार का सम्मान किया जाता है तो यह श्लाघनीय है। उन्होने कहा कि बलराम ने अपनी रचनाओं और सम्पादन कौशल से समाज को निरन्तर समृद्ध किया है।
कवि कथाकार नन्द भारद्वाज ने कहा कि बलराम की कल्म हुए हाथ रचना प्रेमचंद के गोदान के समक्ष खड़ा करके देख सकते हैं। वे सामाजिक जीवन मूल्यों के साथ जीने वाले साहित्यकार हैं। उन्होने विश्व लघु कथा कोश और प्रेमचंद रचनवाली के रूप में साहित्य जगत को अमूल्य थाती सौंपी है।
कवि कथाकार व्यंग्यकर फारूक आफरीदी ने बलराम को सत्य का अन्वेषक और प्रतिरोध का प्रहरी बताते हुए कहा कि वे साहित्य के ऐसे प्रकाश पुंज हैं जो समाज का पथ प्रशस्त करते रहेंगे। उनकी संपादकीय दृष्टि लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील है। \वे प्रेमचंद और रेणु की परंपरा के संवाहक हैं। उनकी रचनाओं में समाज का वाह चेहरा दिखाई देता है जो अक्सर मुख्यधारा के विमर्श से बाहर रह जाता है। वे साहित्यकार और संपादकों में से हैं जो जीवन मूल्यों को जीते हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार श्याम जांगिड़, कविता मुखर, आकार श्रीवास्तव, टीना शर्मा, कमल मेहता, मंजु महिमा भटनागर,जयदेव,अरविंद मारवाड़ी आदि ने बलराम की कथाओं की चर्चा की। समारोह का संचालन राजेंद्र मोहन शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विनोद भारद्वाज, हरीश करमचंदानी, राव शिवराज सिंह, एस भाग्यम, प्रेमचंद गांधी डॉ विशाल विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और प्रबुद्धजन मौजूद थे।
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