राजनेताओं ने अपनी विरासत को दमखम देने में ताकत लगाई
आम कार्यकर्ता को किया नजरंदाज।
धौलपुर (राजीव जगरिया) राजनीति का आधार परिवार कल्याण नहीं बल्कि जन कल्याण होता है लेकिन वर्तमान परिवेश में राजनीति से विरासत और विरासत से राजनीति में जिंदा रहा जा सकता है शायद इसी मानसिकता के चलते दिग्गज राजनेताओं ने आम कार्यकर्ता के बजाय अपनी विरासत को सीचने में ही दमखम लगाया है। वैसे तो विरासत को आगे बढ़ाने की परम्परा वैदिक काल से जुड़ी हुई है और इसको बढ़ाने में वर्तमान राजनेता भी पीछे नहीं है लेकिन वर्तमान राजनीति में एक दूसरे पर विरासत बढ़ाने के आरोप प्रत्यारोप भी लग चुके हैं लेकिन जमीनी धरातल पर देखा जाए तो हर पार्टी के नेता ने अपनी विरासत को सीचने में लगे हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता स्वर्गीय बनवारी लाल शर्मा ने अपनी राजनीति को बिखेरने के लिए अपने दिवंगत पुत्र अशोक शर्मा को राजनीति की धरा पर उतारा लेकिन वह पार्टी सहित अन्य जगह तो अपना बाजूद खड़ा कर पाए लेकिन प्रदेश की पंचायत में जाने के लिए कांग्रेस और भाजपा से दो बार चुनाव लड़ा पर हार का सामना करना पड़ा और अपनी दस्तक दे पाते उससे पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली परंतु उनकी पत्नी नीरजा शर्मा राजाखेड़ा विधान सभा से अभी भी अपनी किस्मत को आजमा रही हैं वहीं पूर्व वित्त मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने अपने परिवार में आई खटास के बाद अपने पुत्र रोहित बोहरा पर दाव लगाया जो आज राज्य की राजनीति में उगता हुआ सूरज नजर आ रहा है। बाडी विधानसभा से जीत की तिकड़ी बनाने वाले विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने अपने पुत्र अजय सिंह मलिंगा को राजनीति का युवराज बना कर बाडी पंचायत समिति का प्रधान बनाया था हालांकि पूर्व विधायक की पत्नी भी बाडी नगर पालिका से सदस्य रह चुकी हैं। करीब एक दशक पूर्व धौलपुर विधान सभा से हाथी पर चढ़ कर बी एल कुशवाह ने अपनी पहचान ही नहीं बनाई बल्कि राज्य की विधान सभा में दस्तक भी दी लेकिन न्यायालय से सजा मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को राजनीति में लाने में ही भलाई समझी और आज वर्तमान विधायक भी है। राजाखेड़ा से पूर्व विधायक और प्रधान रविंद्र सिंह बोहरा ने जब उम्र का चोला पहना तो अपने पुत्र को राजनीति के लिए आगे कर दिया लेकिन वह सफल नहीं हो पाए और आज भी अपने पैर जमाने में लगे हुए हैं। बाडी से विधायक जसवंत सिंह गुर्जर ने अपने पुत्र को नगर पालिका से चुनाव लड़ाया वह सफल भी हुए है लेकिन प्रदेश की राजनीति में अपनी दस्तक देने के लिए उसे तैयार कर रहे हैं। वहीं राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने धौलपुर विधान सभा से चुनाव जीत कर पहचान बनाई क्योंकि मध्य प्रदेश में अपना पहला चुनाव हर गई लेकिन राज्य की मुखिया बनने के बाद अपने पुत्र दुष्यंत सिंह को प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए भेज दिया जो आज भी अपना दमखम दिखा रहे हैं। भाजपा से दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खास हरिचरण सिंह जादौन ने भाजपा से चुनाव लड़ा पर हार गले लगी तो उन्होंने अपने बेटे धर्मपाल सिंह को आजमाया और वह जिले की पंचायत के मुखिया का सरताज पहनने में कामयाब भी रहे।