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भगवान जगन्नाथ को समर्पित ओडिशा का गोटीपुआ नृत्य नर्तकियां बन भगवान को रिझाते हैं लड़के

By Gopal Gupta · 25 Dec 2025 · 16 views
भगवान जगन्नाथ को समर्पित ओडिशा का गोटीपुआ नृत्य

नर्तकियां बन भगवान को रिझाते हैं लड़के

-पहले देवदासियां करती थीं यह सेवा, अब सिर्फ लड़कों को है अधिकार
-लड़कों की वेशभूषा और हाव-भाव होते हैं हुबहू नर्तकियों जैसे

उदयपुर। भगवान जगन्नाथ को समर्पित ओडिशा का गोटीपुआ डांस अपनी भक्ति में सराबोर धमक और चमक को लेकर कला प्रेमियों के दिलाें पर सदियाें से छाया हुआ है। इसके नर्तकों को खासतौर से भगवान जगन्नाथ की सेवा के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। माना जाता है कि पुरी में विराजे भगवान जगन्नाथ की सेवा का अवसर विरलों को ही मिलता है। ऐसे ही सौभाग्यशालियों में गोटीपुआ के नर्तकों का शुमार होता है। बता दें, शिल्पग्राम उत्सव में गुरुवार को मुक्ताकाशी मंच पर इस लोक नृत्य की धमकदार प्रस्तुति दी जाएगी।
डांस ग्रुप के लीडर बसंत प्रधान बताते हैं कि यह डांस ओडिशी क्लासिकल डांस पर बेस्ड है। भगवान जगन्नाथ के मनोरंजन के लिए सदियों पूर्व देवदासियां यह नृत्य करती थीं, उनके बाद अन्य स्त्रियां भी इस सेवा में लगीं। कालान्तर में 1509 ईस्वी से भगवान की इस सेवा में लड़के लगाए गए। तब यह भी निर्णय लिया गया था कि लड़कों को भगवान के वे सभी कार्य करने होंगे, जो पूर्व में स्त्रियां करती थीं। इसमें इस नृत्य के साथ ही मंदिर की सफाई का काम भी शामिल था। ऐसे में लड़कों को स्त्री के रूप में ही मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। तभी से युवक स्त्री भेष में भगवान जगन्नाथ की सेवा करते हैं।

गोटीपुआ का मतलब एक लड़का-

प्रधान बताते हैं कि कालान्तर में गोटीपुआ डांस में एक्रोबेट भी शामिल हुआ, फिर भी इन लोक नर्तकों ने निरंतर अभ्यास और कुशल प्रशिक्षण के कारण अपनी अदाकारी में लावण्यता बरकरार रखी। यद्यपि आज नृत्य के दौरान इनके कई करतब देख दर्शकों की सांसें थम जाती है। वे बताते हैं कि ‘गोटी’ का मतलब होता है ‘एक’ तथा ‘पुआ’ का अर्थ है लड़का, यानी ‘गोटीपुआ’ का मतलब हुआ एक लड़काइस डांस को करने वाले हर नर्तक को ’गोटीपुआ’ कहा जाता है। दरअसल, गोटीपुआ के लिए किसी भी मंदिर में प्रवेश निषिद्ध नहीं होता।

वेशभूषा-

प्रधान बताते हैं कि गोटीपुआ नर्तक साड़ी, ब्लाउज, उत्तरी (कंधे से कमर तक का बेल्ट), पंची (कमर पट्टा), कमर के नीचे कूचो और उसके नीचे धोती जैसा पायजामा पहनते हैं। इनके वस्त्र दुल्हन के वेश की तरह चमचमाते हैं। साथ ही, गहनों में ये अपनी बाहों में बाहुटी, कलाई में बाजू ( विशेष तरह का कंगन), गले में माली (नाभि तक लंबा हार) और पैरों में घूंघरू पहनते हैं. इनके पैर के पंजों में आलता लगा होता है, यानी पूर्ण स्त्री रूप।

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