असंगठित श्रमिकों के हितों की सुरक्षा-सिर्फ कानून नहीं, धरातल पर बदलाव आवश्यक अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष
By Goapl Gupta ·
01 May 2026 ·
24 views
असंगठित श्रमिकों के हितों की सुरक्षा-सिर्फ कानून नहीं, धरातल पर बदलाव आवश्यक
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष
उदयपुर दिनांक 01 मई 2026 | जनमत मंच के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर सविना चौराहा पर वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक,अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास ने कहा की विश्व मजदूर दिवस श्रमिकों के सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन 1886 के शिकागो में मजदूरों द्वारा 8 घंटे काम करने की मांग और 1889 के ऐतिहासिक संघर्षों की याद दिलाता है।
1 मई 1886 को, शिकागो में हजारों मजदूरों ने काम के घंटे अनिश्चित होने के खिलाफ विद्रोह किया, जो 12-16 घंटे काम करते थे। इस आंदोलन में 8 घंटे का कार्य दिवस निर्धारित किया गया।
यह दिन श्रमिक वर्ग की एकता और उनके अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष को याद करता है।भारत में पहला मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मद्रास (चेन्नई) में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मनाया गया था। भारत में इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, मई दिवस, कामगार दिन (मराठी), और कामिकारा दिनचरण (कन्नड़) के रूप में जाना जाता है।
यह दिन दुनिया भर के मजदूरों को एकजुट होने और अपनी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही उचित वेतन सुरक्षित कार्यस्थल और चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जागरूक करता है।
मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहां की असंगठित श्रमिकों के हितों की सुरक्षा- सिर्फ कानून नहीं, धरातल पर भी बदलाव आवश्यक है |
कागजों में श्रम कानून बना देने से असंगठित और शोषित श्रमिकों का भला नहीं होगा। जब तक श्रमिक संगठित नहीं होंगे, तब तक योजनाएं फाइलों में ही दबी रह जाएगी |
वर्तमान स्थिति और चुनौतियां के मद्देनज़र देश में आज भी 90 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूर हैं जो आज भी श्रम कल्याण सुरक्षा योजनाओं के वास्तविक लाभ से वंचित है |
वर्त्तमान समय को देखते हुए केवल कानून बना देना ही काफी नहीं है, उनका क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती है।
समाधान हेतु सामाजिक संगठनो एवं सरकार की मध्यस्थता और संवाद आवश्यक है एवं
श्रम विवादों के समाधान हेतु मध्यस्थता, सुलह, सौदेबाजी और संवाद आधारित प्रक्रिया आवश्यक है । माथुर ने ये भी कहा की महिला श्रमिकों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है |
आज के समय में महिला श्रमिकों को संगठित होना अनिवार्य है। कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा कानून (POSH Act आदि) अनिवार्य रूप से लागु होना चाहिए ।
इस अवसर पर उपस्थित श्रमिक हीरालाल मीणा , पिंटू मीणा , गौतम लाल मीणा, दिनेश चौधरी, प्रकाश, खेमराज , रमेश, खेमा, नरेश, भक्तराम, ज्ञानी राम, एवं गौतम लाल आदि से वार्तालाप हुई और उन्होंने अपनी समस्याओं के बारे में बताया जैसे प्रतिदिन रोजगार न मिलना, काम का समय 8 घंटे होना , काम करने के बाद समय पर पैसे न मिलना। साथ ही चिकित्सा एवं सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए आदि। यह दिन उन सभी मजदूरों और कामगारों को सलाम करने का है जो समाज और देश के निर्माण में अपनी कड़ी मेहनत से योगदान देते हैं।