युग लगता है किसी एक को अटल बिहारी होने में" ◆एक शाम अटलजी के नाम का आयोजन◆
By Gopal Gupta ·
26 Dec 2025 ·
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युग लगता है किसी एक को अटल बिहारी होने में"
◆एक शाम अटलजी के नाम का आयोजन◆
उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की जयन्ती पर उदयपुर आज शाम श्रमजीवी महाविद्यालय सभागार में अटलबिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह समिति के तत्वावधान में "एक शाम अटल जी के नाम" काव्य संध्या का आयोजन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि समाजसेवी जगदीश चन्द्र जोशी, विशिष्ठ अतिथि राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, वंदना मीणा, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर, पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट थे। अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल के सलाहकार प्रो. के.सी.सोडानी ने की।
प्रारंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती व वाजपेयी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण कर कर किया। प्रारम्भ में भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़ ने स्वागत भाषण करते हुए वाजपेयी के जीवनवृत्त की चर्चा की। भाजपा के जिला महामंत्री देवीलाल सालवी, डॉ. पंकज बोराणा, उपाध्यक्ष दिग्विजय श्रीमाली, करणसिंह शक्तावत, तुषार दवे कार्यक्रम संयोजक डॉ. विजय विप्लवी व अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों व कवियों का स्वागत किया।
कवयित्री दीपिका माही की सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुई काव्य संध्या में डॉ. विजय विप्लवी ने अटलजी की कविता 'ठन गयी मौत से ठन गयी" सुनाकर भूमिका रखी।
हास्यकवि डाडम चंद डाडम ने अटलजी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्हें स्मृत किया। वहीं वीररस के कवि बृजराज सिंह जगावत ने "अटल प्रण की धरा पर मेवाड़ स्वाभिमान जिंदा है" पढकर वातावरण को ओजमय कर दिया। श्रेणीदान चारण ने ' भारत भू पर हुआ एक अवतारी था, भारत रत्न मां का सपूत वो अटलबिहारी था ' पढकर अटलजी को नमन किया। वही दीपिका माही ने भक्ति रस के गीत सुनाकर वातावरण में भक्तिरस घोल दिया। वरिष्ठ कवि प्रकाश नागोरी ने ' धीर, वीर गंभीर राष्ट्र के अनुपम पुजारी, तुम मरकर भी अमर हो गये, जय हो अटल तुम्हारी रचना पढी।
डॉ. कुंजन आचार्य ने " मुझको टिकट दिला भगवान" पढकर राजनीति में टिकटार्थियों का आत्मकथन व्यक्त किया।
वीर और ओज रस के कवि सिद्धार्थ देवल ने "सत्ता की हल्की पगडण्डी के यूं भारी होने में, युग लगता है किसी को अटलबिहारी होने में" सुनाकर वातावरण को ऊंचाईयां दी।
संयोजन देवीलाल सालवी व कु़ंजन आचार्य ने व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुंजन आचार्य ने किया।