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विश्व श्रम दिवस पर बाल श्रम आधारित बाल उपन्यास "पहल" का लोकार्पण

By Goapl Gupta · 02 May 2026 · 12 views
विश्व श्रम दिवस पर बाल श्रम आधारित बाल उपन्यास "पहल" का लोकार्पण

उदयपुर विवेक अग्रवाल। राजस्थान साहित्य अकादमी के तत्वावधान में वरिष्ठ बाल साहित्यकार तरुण कुमार दाधीच की 25वीं पुस्तक—बाल उपन्यास “पहल”—का लोकार्पण शुक्रवार को अकादमी के पुस्तकालय सभागार में सम्पन्न हुआ।
सामाजिक समस्या बाल श्रम पर आधारित बाल उपन्यास का विश्व श्रमिक दिवस के उपलक्ष्य में विमोचन किया गया, जिससे पुस्तक की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने की। उन्होंने बाल साहित्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के लिए ऐसी रचनाएँ आवश्यक हैं जो समाज की वास्तविक समस्याओं को संवेदनशील तरीके से उनके सामने रखें।
मुख्य अतिथि कहानीवाला के नाम से पहचाने जाने वाले रजत मेघनानी रहे। उन्होंने “पहल” उपन्यास की सराहना करते हुए कहा कि बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दे पर बाल साहित्य के माध्यम से लिखना सराहनीय प्रयास है। यह न केवल बच्चों को जागरूक करेगा बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर करेगा।
विशिष्ट अतिथि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य थे। डॉ. आचार्य ने अपने वक्तव्य में बाल श्रम की समस्या की गहराई पर प्रकाश डाला और कहा कि लेखक ने आत्मकथ्य शैली में इस उपन्यास की रचना करके न केवल अपने लेखकीय दायित्व का निर्वहन किया बल्कि बाल श्रम से जूझ रहे उस बालक को विद्यालय के कक्षा कक्ष तक पहुँचाने का अति महत्वपूर्ण कार्य करके अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी किया। दाधीच द्वारा बाल साहित्य के क्षेत्र में निरंतर योगदान सराहनीय है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही बाल श्रम जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।
समीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने पुस्तक समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने उपन्यास की भाषा शैली, पात्र-चित्रण और कथानक की सराहना की। डॉ. शर्मा ने कहा कि “पहल” बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जिसमें बाल श्रम की पीड़ा, संघर्ष और मुक्ति की कहानी मार्मिक तरीके से बयान की गई है। यह पुस्तक बच्चों को पढ़ने के साथ-साथ सोचने और समझने के लिए भी प्रेरित करेगी।
अपने लेखकीय उद्बोधन में तरुण कुमार दाधीच ने कहा, “बालश्रम से मुक्त कराकर बालकों को विद्यालयों से जोड़ना नितांत आवश्यक है।” उन्होंने बताया कि विगत तीन दशकों से बाल साहित्य सृजन कर रहे हैं और यह उनकी 25वीं पुस्तक है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिम्मी सिंह चौहान ने किया।
धन्यवाद राजेश मेहता ने दिया।

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