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शिक्षा के लिए 35 लाख की भूमि दान: 65 साल बाद विद्यालय को मिली अपनी जमीन यूडीएच मंत्री बोले— इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं, गढ़टकनेत के भामाशाह बने मिसाल

By Goapl Gupta · 17 May 2026 · 27 views
शिक्षा के लिए 35 लाख की भूमि दान:

65 साल बाद विद्यालय को मिली अपनी जमीन

यूडीएच मंत्री बोले— इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं,

गढ़टकनेत के भामाशाह बने मिसाल

अजीतगढ़. ग्राम गढ़टकनेत में रविवार को आयोजित ग्राम विकास रथ अभियान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में शिक्षा के लिए किए गए 35 लाख रुपए मूल्य के भूमिदान ने पूरे क्षेत्र में नई मिसाल कायम की। गढ़टकनेत ठिकाने के ठाकुर भानुप्रताप सिंह शेखावत ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए अपनी निजी भूमि दान कर दी, जिससे 65 वर्षों से भूमि अभिलेखों की समस्या से जूझ रहे विद्यालय के विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया।

ग्राम गढ़टकनेत स्थित अटल सेवा केंद्र में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि शिक्षा के लिए भूमि दान करना सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने कहा कि “इससे बड़ा कोई दान नहीं और ऐसा कार्य करने वाले व्यक्ति से बड़ा कोई भामाशाह नहीं हो सकता।” मंत्री ने ठाकुर भानुप्रताप सिंह शेखावत को साफा पहनाकर एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया।

विद्यालय के प्राचार्य भीम सिंह सामोता ने बताया कि विद्यालय पिछले 65 वर्षों से जिस भूमि पर संचालित हो रहा था, उसका विधिवत नामांतरण नहीं होने से भवन निर्माण और अन्य विकास कार्य अटके हुए थे। अब भूमिदान के बाद विद्यालय में नए भवन, कक्षाओं और अन्य सुविधाओं के निर्माण का रास्ता खुल गया है।


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भामाशाह की मिसाल

ठाकुर भानुप्रताप सिंह शेखावत ने किया ऐतिहासिक भूमिदान राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय को दी लगभग 35 लाख रुपए मूल्य की भूमि 65 वर्षों से लंबित भूमि समस्या का समाधान विद्यालय भवन निर्माण एवं विस्तार का मार्ग हुआ प्रशस्त शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर प्रेरणादायक पहल



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मंत्री ने कहा— शिक्षा के लिए दान सबसे बड़ा पुण्य

झाबर सिंह खर्रा के प्रमुख कथन

“इससे बड़ा कोई दान नहीं।”

“ऐसा कार्य करने वाले व्यक्ति से बड़ा कोई भामाशाह नहीं हो सकता।”

“पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।”

“ग्राम विकास रथ अभियान का उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।”



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अब क्या बदलेगा विद्यालय में?

भूमिदान से खुलेंगे विकास के नए रास्ते

नए कक्षों और भवन निर्माण की संभावना

खेल मैदान और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार

सरकारी बजट स्वीकृति में अब नहीं आएगी भूमि संबंधी बाधा

विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा

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