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राजस्थान में पाण्डुलिपि संरक्षण की अहम पहल* *फतेहपुर व रतनगढ़ में हस्तलिखित ग्रन्थों का डिजिटलकरण कार्य हुआ शुरू*

By Goapl Gupta · 27 May 2026 · 44 views
*राजस्थान में पाण्डुलिपि संरक्षण की अहम पहल*

*फतेहपुर व रतनगढ़ में हस्तलिखित ग्रन्थों का डिजिटलकरण कार्य हुआ शुरू*

लक्ष्मणगढ़ 27 मई राजस्थान की प्राचीन ज्ञान परम्परा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में ज्ञान भारतम् मिशन, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोगी केन्द्र सेठ सूरजमल तापडिया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवन्तगढ़, कुचामन नागौर ,सुप्रीम फाउंडेशन के अन्तर्गत बुधवार को सरस्वती पुस्तकालय, फतेहपुर व हनुमान पुस्तकालय, रतनगढ़ में प्राचीन हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के डिजिटलकरण और विवरणिका निर्माण कार्य का विधिवत शुभारम्भ हुआ।
यह जानकारी देते हुए वैद्य बालकृष्ण गोस्वामी ने बताया कि इससे राजस्थान की दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। तथा इन केन्द्रों पर संरक्षित संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की दुर्लभ पाण्डुलिपियों को आधुनिक तकनीक द्वारा स्कैन कर सुरक्षित डिजिटल रूप में संग्रहित किया जाएगा। इससे भविष्य में शोधार्थियों और विद्वानों को इन अमूल्य धरोहरों का अध्ययन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का संचालन डॉ. अल्का शर्मा के निर्देशन और देखरेख में प्रारम्भ हुआ है। उन्हें सरस्वती पुस्तकालय और हनुमान पुस्तकालय की नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके मार्गदर्शन में दोनों केन्द्रों पर पाण्डुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलकरण तथा व्यवस्थित विवरणिका तैयार करने का कार्य चरणबद्ध रूप से सम्पन्न किया जाएगा। पाण्डुलिपि विशेषज्ञ डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा राजस्थान समन्वयक ज्ञान भारतम् मिशन के अनुसार यह परियोजना न केवल राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन और संरक्षण को भी नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रयास भारतीय पाण्डुलिपि परम्परा को डिजिटल माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है।

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