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हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ पर समर्पित सिटी पैलेस में स्मृति प्रदर्शनी

By Goapl Gupta · 19 Jun 2026 · 11 views
हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ पर समर्पित सिटी पैलेस में स्मृति प्रदर्शनी

उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल।

मेवाड़ की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में समर्पित महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा मेवाड़ तथा भारत के इतिहास की एक निर्णायक घटना ‘हल्दीघाटी युद्ध’ के 450वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘‘450 वर्ष: हल्दीघाटी युद्ध‘‘ नामक प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन मेवाड़ राजपरिवार के 77वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी, महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के करकमलों से हुआ।

फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि प्रदर्शनी सिटी पैलेस संग्रहालय के छोटा दरीखाना में 18 जून 2026 से 28 अगस्त 2026 तक आमजन के लिए खुली रहेगी। फाउण्डेशन द्वारा प्रदर्शित प्रदर्शनी के माध्यम से ‘हल्दीघाटी युद्ध’ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की अमर विरासत तथा मेवाड़ की अदम्य आत्मा को समर्पित है, जिसकी सम्मान, कर्तव्य, स्वाभिमान और स्वाधीनता के प्रति अटूट निष्ठा, आज भी विश्वभर की पीढ़ियों को प्रेरित करती है।

हल्दीघाटी: इतिहास, स्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक:

वर्ष 1576 ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा प्रताप और आमेर के कुंवर मानसिंह के नेतृत्व वाली मुगल सेना के मध्य लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध राजस्थान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग रहा है। यह युद्ध सदियों से साहस, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और स्वाधीनता की रक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता रहा है। लोक परंपराओं, साहित्य, लोककथाओं तथा कला के विविध माध्यमों ने इस स्मृति को जीवंत बनाए रखा है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1576 से 2026 तक के 450 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा को चिह्नित करती यह प्रदर्शनी दो शताब्दियों से अधिक समय में विकसित हुई कलात्मक व्याख्याओं का एक अद्वितीय दृश्य-आख्यान प्रस्तुत करती है।

प्रदर्शनी में मेवाड़ दरबार के विख्यात चित्रकार चोखा द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में महाराणा भीम सिंह (1778-1828 ई.) के शासनकाल में निर्मित हल्दीघाटी युद्ध विषयक पाँच दुर्लभ चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। इनके साथ वर्ष 1935 में कलाकार चतुर्भुज द्वारा निर्मित एक विशाल कलाकृति तथा वर्ष 2026 में आर्टिस्ट राहुल माली द्वारा विशेष रूप से निर्मित नवीन चित्रकला भी प्रदर्शित की गई है।

ये सभी कलाकृतियाँ सामूहिक रूप से दर्शाती हैं कि किस प्रकार हल्दीघाटी की स्मृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित, पुनर्परिभाषित और पुनर्सृजित किया जाता रहा है। साथ ही, यह प्रदर्शनी मेवाड़ में कला संरक्षण की विकसित होती परंपरा तथा समकालीन सांस्कृतिक विमर्श में महाराणा प्रताप की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करती है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अनुपम उदाहरण:

यह प्रदर्शनी एक उल्लेखनीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी परिणाम है, जिसके अंतर्गत महत्वपूर्ण कलाकृतियाँ एवं संग्रह निम्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के सौजन्य से उपलब्ध हुए हैं, जिनमें ‘रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ इंग्लैंड एंड आयरलैंड’, ‘पार्सन फैमिली कलेक्शन (क्रिस्टीज़ इमेजेज लिमिटेड के सौजन्य से), अमेरिका से गुरुशरण एवं एलविरा सिद्धू के साथ ही राजसमंद से ‘रावत वीरभद्र सिंह, देवगढ़ और सिटी पैलेस संग्रहालय, उदयपुर के स्थायी संग्रह की चित्रावलियां प्रमुख हैं।

मेवाड़ की विरासत संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्धता:

श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रदर्शनी मेवाड़ राजपरिवार की उस सतत् प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक संरक्षित एवं प्रसारित किया जा रहा है।

इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि ‘हल्दीघाटी की गाथा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि प्रेरणा का एक जीवंत स्रोत है, जो हमें विपरीत परिस्थितियों में साहस, उद्देश्य के प्रति दृढ़ विश्वास और राष्ट्र सेवा का मार्ग दिखाती है।’

उन्होंने आगे कहा कि ‘महाराणा प्रताप, हल्दीघाटी और मेवाड़ की जीवंत विरासत सम्पूर्ण विश्व की धरोहर हैं। मेवाड़ राजपरिवार के 77वें संरक्षक के रूप में मेरा दायित्व है कि मैं इस अमूल्य विरासत का संरक्षण करूँ, इसकी रक्षा करूँ और इसे भारत सहित विश्व समुदाय तक पहुँचाऊँ।’

इतिहास के इन स्वर्णिम अध्यायों से विशेषकर युवाओं एवं नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने, समझने और आत्मसात करने की आवश्यकता है। मैं महाराणा प्रताप तथा मेवाड़ के उन असंख्य वीर योद्धाओं को अपने शाश्वत प्रणाम अर्पित करता हूँ जिन्होंने मेवाड़ ही नहीं सम्पूर्ण देश के सम्मान, स्वाभिमान और गौरव की रक्षा हेतु अद्वितीय बलिदान दिए।

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