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सांसद डॉ रावत ने डिप्टी सीएम डॉ प्रेमचंद बैरवा से की चर्चा

By Goapl Gupta · 30 Jun 2026 · 13 views
सांसद डॉ रावत ने डिप्टी सीएम डॉ प्रेमचंद बैरवा से की चर्चा


उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल। राजसेस सोसायटी महाविद्यालयों में अस्थाई टीचिंग एसोसिएट भर्ती (संविदा) 2026 में अनुसूचित क्षेत्र में आरक्षण लागू करने को लेकर राज्य सरकार का विचार सकारात्मक है। इस संबंध में सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने डिप्टी सीएम डॉ प्रेमचंद बैरवा को मांगपत्र सौंपकर विस्तृत चर्चा की थी।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्र के समस्त विद्या संबल अतिथि शिक्षकों की ओर से राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के समस्त विद्या संबल अतिथि शिक्षकों द्वारा टीचिंग एसोसिएट भर्ती 2026 में अनूसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान दिये जाने की मांग की गई है। बताया कि राज्यपाल द्वारा राज्य में संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के अधीन पंचम अनुसूची के पेरा 5 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अनुसूचित क्षेत्र में शैक्षिक संस्थाओं में सीटों एवं राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों एवं पदों का आरक्षण के विशेष प्रावधान लागू किये गये है। इन्हीं प्रावधानों के अनुरूप राज्य में विभिन्न भर्ती परीक्षा में अनुसूचित क्षेत्र के स्थानीय लोगों (एस.सी. एस.टी., ओबीसी एवं सामान्य वर्ग) को आरक्षण प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर द्वारा राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी के टीचिंग एसोसियेट (संविदा आधारित) पदों के लिए सीधी मर्ती 2026 में अनुसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों को आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, अनुसूचित क्षेत्र के लिए नोडल विभाग है तथा उनकी टिप्पणी इस संबंध में प्राप्त की जानी आवश्यक है। राज्य के टी.ए.डी मंत्री बाबुलाल खराड़ी से भी इस पर सकारात्मक रूख रखते है।
सांसद डॉ रावत ने बताया कि इस समस्या का प्रभाव क्षेत्र के विभिन्न कॉलेजों में अध्ययनरत करीब 01 लाख विद्यार्थियों के अध्यापन कार्य पर पडने वाला है, जो कि निश्चित ही विचारणीय है। सांसद डॉ रावत ने इस भर्ती परीक्षा विज्ञापन में आवश्यक संशोधन कराते हुए अनुसूचित क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए नियमानुसार अनुसूचित क्षेत्र का आरक्षण प्रदान करने के साथ ही अनुभव में 30 प्रतिशत एवं आयुसीमा में 10 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान करने की मांग की। उनके अनुसार 1995,1996, 1999, 2009, 2016 में इस तरह के प्रकरणों में आदिवासी क्षेत्र के हित में सकारात्मक निर्णय लिए हैं। इससे आशा बनती है। इस पर डिप्टी सीएम डॉ प्रेमचंद बैरवा की ओर से सकारात्मक रुख व्यक्त किया गया है।

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