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घुटनों के दर्द से मिलेगी स्थायी राहत: सीकर के *टीबड़ा हॉस्पिटल में रोबोटिक 'कार्टिलेज रिप्लेसमेंट*' तकनीक शुरू, डॉ॰ रमाकांत टीबड़ा के नेतृत्व में मरीजों को मिली नई सौगात

By Goapl Gupta · 08 Jul 2026 · 15 views
घुटनों के दर्द से मिलेगी स्थायी राहत: सीकर के *टीबड़ा हॉस्पिटल में रोबोटिक 'कार्टिलेज रिप्लेसमेंट*' तकनीक शुरू, डॉ॰ रमाकांत टीबड़ा के नेतृत्व में मरीजों को मिली नई सौगात

​शेखावाटी में मेडिकल साइंस की नई क्रांति; 'रोबोटिक मिडियल कार्टिलेज रिप्लेसमेंट' से सुरक्षित रहेगा मरीजों का प्राकृतिक घुटना, रिकवरी भी होगी तेज।

​सीकर,
​बढ़ती उम्र, मोटापा और खराब जीवनशैली के कारण घुटनों के दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस) की समस्या आज के समय में बेहद आम हो गई है। शेखावाटी और आसपास के क्षेत्र के मरीजों के लिए चिकित्सा जगत से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। सीकर के सुप्रसिद्ध टीबड़ा हॉस्पिटल (Tibra Hospital) में अब 'रोबोटिक मिडीयल कार्टिलेज रिप्लेसमेंट' (Robotic Medial Cartilage Replacement) नामक एक नई और अत्याधुनिक सेवा की शुरुआत की गई है।
​वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ॰ रमाकांत टीबड़ा (Dr. Ramakant Tibra) के कुशल नेतृत्व में शुरू की गई इस तकनीक के आने से मरीजों को अब पूरा घुटना बदलने (टोटल नी रिप्लेसमेंट) के दर्द और लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

-​क्या है यह नई तकनीक और कैसे काम करती है?
अस्पताल के निदेशक और वरिष्ठ सर्जन डॉ रमाकांत टीबड़ा ने बताया कि घुटने के अंदरूनी हिस्से का कार्टिलेज घिसने से हड्डियों के बीच घर्षण होने लगता है, जिससे मरीजों को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। पहले इस समस्या के गंभीर होने पर अंतिम विकल्प के रूप में 'संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण' (Total Knee Replacement) ही किया जाता था।
​लेकिन, इस नई रोबोटिक प्रक्रिया के तहत, केवल उसी हिस्से के डैमेज कार्टिलेज को बदला जाता है जो वास्तव में खराब हो चुका है। रोबोटिक आर्म और 3D मैपिंग तकनीक की मदद से सर्जन घुटने की एकदम सटीक तस्वीर प्राप्त करते हैं, जिससे सर्जरी 100% सटीकता के साथ की जाती है और घुटने के स्वस्थ हिस्से (लिगामेंट और हड्डियों) को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
​रोबोटिक मिडियल कार्टिलेज रिप्लेसमेंट के मुख्य फायदे:
​प्राकृतिक घुटने की सुरक्षा: इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज का असली घुटना सुरक्षित रहता है। केवल डैमेज कार्टिलेज को ही कृत्रिम इम्प्लांट से रिप्लेस किया जाता है।
​अचूक सटीकता: रोबोटिक सहायता से होने के कारण इम्प्लांट बिल्कुल सही एंगल और जगह पर फिट होता है, जिससे मानवीय भूल की गुंजाइश शून्य हो जाती है।
​तेज रिकवरी (Fast Recovery): यह एक 'मिनिमली इनवेसिव' (कम चीरे वाली) प्रक्रिया है। इसके कारण रक्तस्राव बेहद कम होता है और मरीज सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद चलने-फिरने में सक्षम हो जाता है।
​अस्पताल से जल्दी छुट्टी: पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें मरीज को अस्पताल में कम दिन बिताना पड़ता है और दर्द निवारक दवाओं की भी कम आवश्यकता होती है।
​सक्रिय जीवनशैली में वापसी: मरीज बहुत ही कम समय में अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों, जैसे सीढ़ियां चढ़ना, गाड़ी चलाना और जमीन पर बैठना जैसी सामान्य एक्टिविटीज में वापस लौट सकते हैं।
​क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान
डॉ. रमाकांत टीबड़ा के अनुसार, यह तकनीक विशेषकर उन 40 से 80 वर्ष के मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जिनके घुटने का केवल एक हिस्सा खराब हुआ है। पूरा घुटना बदलने से अक्सर मरीजों को जमीन पर बैठने या कुछ खास गतिविधियों में परेशानी होती है, लेकिन इस नई तकनीक से घुटना बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से काम करता है।
​अब तक इस तरह की विश्वस्तरीय और आधुनिक रोबोटिक सुविधाओं के लिए क्षेत्र के लोगों को जयपुर, दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों का भारी नुकसान होता था। लेकिन अब सीकर के टीबड़ा हॉस्पिटल में ही डॉ. रमाकांत टीबड़ा की देखरेख में यह सेवा उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को घुटने के दर्द से स्थायी मुक्ति मिल सकेगी।

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