उदयपुर में ऐतिहासिक चातुर्मास की ओर बढ़े कदम, उदयपुर में भव्य मंगल प्रवेश 12 जुलाई को
By Goapl Gupta ·
08 Jul 2026 ·
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उदयपुर में ऐतिहासिक चातुर्मास की ओर बढ़े कदम, उदयपुर में भव्य मंगल प्रवेश 12 जुलाई को
उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल । उदयपुर सीमा पर मुनि आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के भव्य स्वागत में चातुर्मास को लेकर उमड़ा जन सैलाब, चातुर्मास से पहले धर्ममय हुआ मेवाड़, फूलों की वर्षा और जयकारों के बीच उदयपुर की सीमा में पहुंचे मुनि आदित्य सागर जी महाराज
उदयपुर। आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में चातुर्मास के लिए उदयपुर पधार रहे परम पूज्य श्रुत संवेगी महाश्रमण पूज्य मुनि आदित्य सागर जी महाराज ससंघ का बुधवार को उदयपुर जिले की सीमा में प्रवेश पर चातुर्मास कमेटी एवं आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट सेक्टर 11 के संयुक्त तत्वावधान मे सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से भव्य एवं भावपूर्ण अगवानी की गई। उदयपुर से सुबह करीब 5 बजे 100 से अधिक कारों के काफिले में सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं जयसमंद पहुंचे और गुरुदेव का ढोल-नगाड़ों, मंगलध्वनि तथा जयकारों के बीच भव्य स्वागत किया। गुरुदेव के जयघोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। गुरुदेव की मंगल आगवानी के दौरान आदिनाथ युवा मंच के अध्यक्ष पवन जीरावत एवं उनकी टीम और गुरु सेवा संघ के सदस्यों का अभूतपूर्व सहयोग रहा।
चातुर्मास समिति अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि खेराड़ से लगभग 9 किलोमीटर का पद विहार करते हुए मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ जयसमंद पहुंचे। उदयपुर जिले में प्रवेश के बाद जयसमंद से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर समाजजनों ने उनका भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पूजन सामग्री लेकर सडक़ किनारे खड़े रहे और गुरुदेव के पहुंचते ही जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर आरती उतारी तथा विधि-विधान से पाद प्रक्षालन किया। यह आयोजन चातुर्मास कमेटी, आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, उदयपुर एवं गुरु भक्तों के सहयोग से संपन्न हुआ।
गुरुदेव के स्वागत में पूरे मार्ग को फूलों से सजा दिया गया। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जयसमंद तक लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। हर कोई गुरुदेव के दर्शन, आशीर्वाद और चरणरज प्राप्त करने के लिए उत्साहित दिखाई दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो गुरुदेव के उदयपुर जिले में प्रवेश के साथ ही पूरी मेवाड़ की धरती धर्ममय वातावरण से सराबोर हो उठी हो।
गुरुदेव के साथ पदयात्रा कर रहे श्रद्धालुओं में भी अपार उत्साह देखने को मिला। उनके प्रत्येक कदम के साथ श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरे मार्ग में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज की जय के उद्घोष निरंतर गूंजते रहे। स्वागत के दौरान चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष अशोक शाह, आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा, महावीर प्रसाद सिंघवी, मदन देवड़ा, कमलकांत जोलावत, तरुण क्रांति मंच अध्यक्ष विमल नाथूत, सुरेश बखारिया, महिला मंडल सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित रहे। चातुर्मास समिति अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि उदयपुर में पूज्य गुरुदेव का यह पहला चातुर्मास है। इसे ऐतिहासिक बनाने के लिए सकल दिगंबर जैन समाज तन, मन और धन से जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के व्यक्तित्व की दिव्यता और आध्यात्मिक आभा ऐसी है कि लोग स्वत: ही उनकी ओर आकर्षित होते हैं। उन्हें विश्वास है कि यह चातुर्मास उदयपुर के धार्मिक इतिहास में एक नई पहचान स्थापित करेगा।
आदिनाथ दिगंबर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने कहा कि गुरुदेव के चातुर्मास को लेकर केवल दिगंबर जैन समाज ही नहीं, बल्कि सर्व समाज में भी उत्साह और हर्ष का वातावरण है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव सभी समाजों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और जहां भी उनका प्रवास होता है, वहां बड़ी संख्या में लोग धर्म और आध्यात्म से जुड़ते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार का चातुर्मास उदयपुर और मेवाड़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
जयसमंद पहुंचने के बाद आयोजित धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में आगामी चातुर्मास की निमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर चातुर्मास समिति अध्यक्ष अशोक शाह, महामंत्री कमलकांत जोलावत, महावीर प्रसाद सिंघवी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को धर्म, संस्कार और आध्यात्म से जोडऩे का महापर्व है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का उद्देश्य धर्म से दूर हो चुके लोगों को पुन: सद्मार्ग पर लाना, सर्वधर्म समभाव, अहिंसा और सदाचार का संदेश देना है।
मुनि श्री ने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज सबसे अधिक आवश्यकता नई पीढ़ी को धर्म से जोडऩे की है। यदि युवा प्रतिदिन प्राचीन मंदिरों में जाना प्रारंभ कर दें, तो केवल मंदिर ही नहीं, हमारी संस्कृति और परंपराएं भी पुन: जीवंत हो उठेंगी। उन्होंने कहा कि उनके इस चातुर्मास का प्रमुख संकल्प युवाओं तथा धर्म से दूर हुए लोगों को पुन: धर्म, संस्कार और पुण्य के मार्ग से जोडऩा रहेगा।
अशोक शाह ने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने दोपहर 2.00 बजे पिलाधर के लिए विहार किया। करीब 9 किलोमीटर की पदयात्रा करने के बाद गुरुदेव पीलाधर पहुंचे और रात्रि विश्राम वही किया। शाह ने बताया कि उदयपुर में भव्य मंगल प्रवेश आगामी 12 जुलाई को होगा।