आध्यात्मिक शिक्षण शिविर के तीसरे दिन हुआ भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का अद्भुत संगम
By Goapl Gupta ·
30 Dec 2025 ·
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आध्यात्मिक शिक्षण शिविर के तीसरे दिन हुआ भक्ति, ज्ञान और संस्कारों का अद्भुत संगम
—उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। श्री कुन्दकुन्द कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति, उदयपुर के तत्वावधान में हुमड़ भवन, गारियावास में आयोजित चार दिवसीय आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का तृतीय दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति, ज्ञान एवं संस्कारों से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ।
समिति के महामंत्री राजमल गोदड़ोत ने बताया कि प्रात:कालीन कार्यक्रम में सर्वप्रथम अभिषेक, पूजन एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का आयोजन अत्यंत विधिपूर्वक एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. अंकित शास्त्री, डॉ. तपिश शास्त्री तथा शाश्वत बालिकाओं ने अपने मधुर, सुरीले एवं भावपूर्ण भक्ति-भजनों से सम्पूर्ण सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके स्वर-साधना से पूरा सभागृह भक्ति-रस में सराबोर हो उठा। विधान में आये सभी श्रद्धालु आत्मविभोर होकर भक्ति में खूब झूमे।
विधान उपरांत पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के प्रेरणादायी वीडियो प्रवचन का श्रवण कराया गया। जिसमें उपस्थित साधर्मीजन को आत्मचिन्तन की गहन दिशा प्रदान की। इसके पश्चात बाहर से पधारे दोनों विद्वानों द्वारा आध्यात्मिक व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिनमें आत्मा के शुद्ध स्वरूप, वीतराग दृष्टि एवं आत्मबोध के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया।
सायंकालीन सत्र में जिनेंद्र भक्ति का आयोजन किया गया। साथ ही बच्चों के लिए पाठशाला तथा वरिष्ठजनों के लिए द्वय विद्वानों के व्याख्यान समानांतर रूप से संचालित हुए। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला से पूर्व उन बच्चों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने जैन ग्रंथों के आधार पर कण्ठस्थ पाठ प्रस्तुत कर अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति एवं जिनवाणी के प्रति गहरी रुचि का परिचय दिया।
अल्प आयु में ही जिनवाणी को कंठस्थ करने वाले इन बालकों के प्रयासों से प्रभावित होकर डॉ. जिनेंद्र शास्त्री व मनोहर भोरावत, पं. रमेश शास्त्री, पं. गजेंद्र शास्त्री, राजमल गोदड़ोत एवं चांदमल किकवत ने बच्चों को विशेष पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की। इस घोषणा का सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से उत्साहपूर्वक अनुमोदन किया।
इसके पश्चात कार्यक्रम का सुंदर मंगलाचरण कौतुकी, प्रांजल, आरोही, प्रियल, प्रमिति ने किया एवं ‘संस्कारतीर्थ शाश्वतधाम’, डबोक की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत आध्यात्मिक नाटक आत्मा का सार — समयसार ने दर्शकों को आत्मिक अनुभूति से भर दिया। नाटक में आत्मा के शुद्ध स्वरूप, बंधन-मोक्ष की प्रक्रिया तथा वीतराग दर्शन को अत्यंत प्रभावशाली एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर विदुषी भाग्यश्री शास्त्री ने बताया कि उक्त नाटक में समयसार ग्रंथ के प्रत्येक अधिकार से चयनित अंशों को समाहित कर श्रोताओं के समक्ष समयसार के सार तत्वों को सरल, सजीव एवं बोधगम्य रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। नाटक को दर्शकों ने अत्यंत सराहनीय एवं आत्मस्पर्शी बताते हुए मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रभारी डॉ. निलेश शास्त्री ने सभी शाश्वत बालिकाओं, कलाकारों, विद्वानों एवं उपस्थित श्रद्धालु सभा के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साधर्मीजन के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। इस दौरान 31 दिसम्बर को होने वाले शिविर के समापन समारोह की संपूर्ण रूपरेखा एवं कार्यक्रम विवरण डॉ. महावीर शास्त्री द्वारा श्रद्धालुओं को विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया।