मुनिश्री आदित्य सागर जी
By Goapl Gupta ·
15 Jul 2026 ·
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मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज
उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल। सर्वऋतु विलास स्थित महावीर जिनालय में बुधवार प्रात: आयोजित धर्मसभा में परम पूज्य श्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को सफल एवं सार्थक जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन पर उसकी संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति का भविष्य और जीवन की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि वह किन लोगों के संपर्क और सानिध्य में रहता है।
मुनिश्री ने कहा कि यदि व्यक्ति पुण्यात्माओं की संगति में रहता है तो उसका जीवन निरंतर सफलता, सदाचार और आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होता है। वहीं, यदि वह पापात्माओं एवं दुष्प्रवृत्ति वाले लोगों की संगति अपनाता है तो उसका जीवन बुराइयों, दुव्र्यसनों और अंतत: विनाश की ओर बढऩे लगता है। इसलिए सदैव पुण्यात्माओं का सानिध्य ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि उनकी संगति से मन के भाव शुद्ध बने रहते हैं और ज्ञान का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि कुसंगति व्यक्ति को नशा, हिंसा, अनैतिकता और अन्य अनेक बुराइयों की ओर ले जाती है। इसके विपरीत, पुण्यात्माओं का सानिध्य जीवन में सद्बुद्धि, विवेक और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है तथा बुरे संस्कार स्वत: दूर होने लगते हैं।
धर्मसभा में मुनिश्री ने वर्तमान पंचम काल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय पुण्यात्माओं का सानिध्य प्राप्त करना सरल नहीं है। आज समाज में दुष्प्रवृत्तियों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है, ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह विवेकपूर्वक श्रेष्ठ संगति का चयन करे और ज्ञानार्जन के माध्यम से अपने जीवन को पुण्यमय बनाए। उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम समय में धन-संपत्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति के शुभ कर्म ही उसके साथ जाते हैं।
मुनिश्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पुण्यात्मा वही है जिसके आचार-विचार और चरित्र पवित्र हों, जिसके मन में राग-द्वेष, ईष्र्या अथवा किसी के प्रति दुर्भावना न हो। इसके विपरीत, जो व्यक्ति सदैव दूसरों का अहित सोचता है, जिसका आचरण और चरित्र अशुद्ध होता है तथा जिसके मन में बुराई का वास रहता है, वही पापात्मा कहलाता है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सदैव सत्संग, सदाचार और सद्विचार को अपनाकर अपने जीवन को सफल, शांतिमय और कल्याणकारी बनाएं।
चातुर्मास समिति अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि प्रात:कालीन शुभ बेला में मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान श्रीजी का शांतिधारा एवं अभिषेक संपन्न हुआ। इस अवसर पर शान्ति लाल जी भोजन, शान्ति लाल जी भानावत, श्रीपाल धर्मावत, गेंदा लाल जी फान्दोत, कुन्थु कुमार जी केशव नगर, सुमति प्रकाश जी राटीया, कालुलाल जी चित्तौड़ा, पारस चित्तौड़ा एवं महावीर प्रसाद सिंघवी उपस्थित रहे और धर्म लाभ प्राप्त किया। धर्मसभा का संचालन ज्योति बाबू शास्त्री ने किया। पारस चित्तौड़ा ने बताया कि धर्मसभा से पूर्व गुरु भक्तों द्वारा दीप प्रज्वलन, मुनिश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं मंगलाचरण जैसे मांगलिक आयोजन संपन्न हुए। सभा के अंत में सभी श्रावक-श्राविकाओं ने गुरु भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उदयपुर में महाश्रमण पूज्य मुनिश्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ससंघ का संभावित आगामी प्रवास
16 जुलाई - हुमड भवन, 17 जुलाई - उदासीन आश्रम ( अशोक नगर ), 18 जुलाई - आयड,19 - 20 जुलाई - शीतल धाम में सर्वोदय सर्वविघ्नहरण - श्री भक्तामर स्तोत्र विधान, 21 जुलाई - पाहाडा पदम प्रभु मंदिर , 22 - 23 जुलाई - सेक्टर - 5 , 24 जुलाई - गायरिया वास, 25 जुलाई - संभवनाथ जिनालय में प्रवास रहेगा। उसके बाद ,26 जुलाई को पुन: मंगल प्रवेश चातुर्मास स्थल श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट भगवान महावीर नगर, सेक्टर 11, हीरणमगरी, उदयपुर में होगा।
अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के पावन दिवस पर
फतह स्कूल प्रांगण सूरज पोल में भव्य चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव होगा।