प्रसूता की मौत के बाद एमसीएच अस्पताल के बाहर धरना, जांच और कार्रवाई की मांग तेज*
By Goapl Gupta ·
17 Jul 2026 ·
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*प्रसूता की मौत के बाद एमसीएच अस्पताल के बाहर धरना, जांच और कार्रवाई की मांग तेज*
*परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, डॉक्टरों ने कहा- समय पर उपचार और रेफरल किया गया; मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग*
रिपोर्टर:(शिंभू सिंह शेखावत) जनतंत्र की आवाज, राजस्थान
नीमकाथाना क्षेत्र मे नवनिर्मित एमसीएच (मातृ एवं शिशु) अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद गुरुवार को अस्पताल परिसर के बाहर परिजनों और ग्रामीणों ने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। मृतका के परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से जांच, दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की। वहीं अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि मरीज का उपचार निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया और स्थिति गंभीर होने पर समय रहते रेफर भी कर दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम खादरा निवासी अंजली सैनी की 14 जुलाई को नीमकाथाना एमसीएच अस्पताल में ऑपरेशन के माध्यम से डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद दोपहर करीब 3:30 बजे ब्लीडिंग शुरू हुई, जिस पर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। मरीज का ब्लड ग्रुप O नेगेटिव होने और उस समय ब्लड की उपलब्धता नहीं होने के कारण शाम करीब 5 बजे जयपुर रेफर कर दिया गया।
परिजन मरीज को जयपुर के बजाय बराला हॉस्पिटल, लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान 16 जुलाई देर रात उसकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप
मृतका के परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते पर्याप्त उपचार और रक्त की व्यवस्था हो जाती तो प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी। इसी मांग को लेकर परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मेडिकल बोर्ड से निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई तथा आर्थिक सहायता की मांग रखी। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच दो दौर की वार्ता हुई, लेकिन देर शाम तक कोई सहमति नहीं बन सकी।
धरने के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता विनोद भूदौली, गोपाल सैनी, मंजू सैनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एहतियात के तौर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।
*चिकित्सकों का पक्ष*
अस्पताल में कार्यरत डॉ. गुमान सिंह यादव ने दूरभाष पर बताया कि प्रसूता का उपचार समय पर किया गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में ही परिजनों को मरीज के O नेगेटिव ब्लड ग्रुप के बारे में जानकारी दी गई थी। परिजन ब्लड बैंक से रक्त की व्यवस्था कर लाएं इसके बाद रक्त चढ़ाया गया और आवश्यक जांच के उपरांत सुरक्षित डिलीवरी करवाई गई।डॉक्टर यादव के अनुसार डिलीवरी के बाद अचानक ब्लीडिंग शुरू होने पर ऑन ड्यूटी चिकित्सक डॉक्टर हेमंत कटारिया और उन्होंने मिलकर तत्काल उपचार किया स्थिति गंभीर होने और आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण बिना विलंब मरीज को उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया। उनका कहना है कि रेफर करने के समय पूरी चिकित्सकीय जानकारी परिजनों को दी गई थी।
*एमसीएच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल*
इस घटना के बाद कुछ लोगों ने नव शुरू हुए एमसीएच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं उनका कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ,ब्लड उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को पूरी तरह विकसित करने के बाद ही इसे शुरू किया जाना चाहिए था।वहीं दूसरी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ के जांच का इंतजार करना आवश्यक है।
*निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने लाएगी*
यह मामला एक परिवार के लिए गहरा दुख लेकर आया है ऐसे संवेदनशील मामलों में भावनाओं के साथ-साथ तथ्यों का भी महत्व होता है यदि उपचार में कहीं लापरवाही हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं यदि चिकित्सकों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपचार किया है ,तो यह भी जांच के माध्यम से स्पष्ट होना चाहिए। फिलहाल प्रशासन की कोशिश है कि परिजनों से संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए।
उल्लेखनीय है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच किस स्तर पर करते हैं और जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।
वर्तमान समय में राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं लेकिन जरूरी नहीं है की प्रसूता की मौत होने में डॉक्टर की ही भूमिका हो अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं सभी प्रसुताओं की मौत को डॉक्टरों की लापरवाही से नहीं जोड़ना चाहिए।