बैंकों के प्रथम राष्ट्रीयकरण दिवस – 19 जुलाई
By Goapl Gupta ·
18 Jul 2026 ·
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बैंकों के प्रथम राष्ट्रीयकरण दिवस – 19 जुलाई
संजय चौहान रूपवास भरतपुर
19 जुलाई 1969 को 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण सरकार द्वारा किया गया था। सरकार द्वारा बैंकों का निजीकरण से राष्ट्रीयकरण की ओर ले जाने का महत्वपूर्ण कारण सभी को सस्ती और बेहतर बैंकिंग सुविधा प्रदान करना था। राष्ट्रीयकृत बैंकों का मुख्य उद्देश्य देश के आर्थिक विकास को गति देना, वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करना और प्राथमिक क्षेत्रों — कृषि, लघु उद्योग और कमजोर वर्ग — को आसान ऋण उपलब्ध कराना था।
बैंकिंग सुविधाओं को केवल शहरों तक सीमित न रखकर सुदूर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों तक पहुँचाना; बैंकिंग प्रणाली में आम जनता का भरोसा बढ़ाना और राष्ट्रीय बचत को बढ़ावा देकर उसे उत्पादक कार्यों में लगाना; मुट्ठी भर बड़े व्यापारियों और धनी लोगों के हाथों में आर्थिक सत्ता के केन्द्रीकरण को रोकना; तथा कृषि, छोटे-मध्यम और कमजोर आय वाले वर्गों को सस्ता और समय पर ऋण उपलब्ध कराना — जिन्हें निजी बैंक अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते थे — ये सभी इसके उद्देश्य थे। पंचवर्षीय योजनाओं में देश के नियोजित आर्थिक विकास और सामाजिक ढांचे के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बैंकिंग प्रणाली पर सरकारी नियंत्रण आवश्यक था, जो कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद ही संभव हो सका।
भारत में राष्ट्रीयकृत बैंकों का इतिहास स्वतन्त्रता के बाद के युग से जुड़ा है, जब भारत सरकार ने बैंकिंग सेवाओं की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों के राष्ट्रीयकरण का निर्णय लिया। राष्ट्रीयकरण की पहली शुरुआत 1969 में हुई, जब 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। उसके बाद 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिससे भारत में राष्ट्रीयकृत बैंकों की कुल संख्या 20 हो गई। बाद में सरकार द्वारा छोटे राष्ट्रीयकृत बैंकों को बड़े बैंकों में आकार और व्यवसाय के आधार पर मर्ज कर इनकी संख्या बारह कर दी गई, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक भी सम्मिलित है।
उपेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
वित्तीय साक्षरता सलाहकार
पंजाब नेशनल बैंक
वित्तीय साक्षरता केन्द्र
भरतपुर