अच्छे मित्र ही सफल जीवन की आधारशिला, गुरु से बड़ा कोई मित्र नहीं : मुनि श्री आदित्य सागर मुनिश्री रविवार को शीतलधाम में, 151 जोड़ों के साथ भक्तामर विधान होगा
By Goapl Gupta ·
19 Jul 2026 ·
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अच्छे मित्र ही सफल जीवन की आधारशिला, गुरु से बड़ा कोई मित्र नहीं : मुनि श्री आदित्य सागर
मुनिश्री रविवार को शीतलधाम में, 151 जोड़ों के साथ भक्तामर विधान होगा
उदयपुर संवाददाता विवेक अग्रवाल। आयड़ चैत्यालय में शनिवार को आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को सफल जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र बताते हुए कहा कि जीवन की सफलता सही संगति और सच्चे मित्रों के चयन पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो अच्छे, ज्ञानवान और बुद्धिमान मित्र बनाइए। दुष्ट और गलत प्रवृत्ति के लोगों से मित्रता अंतत: जीवन को विनाश की ओर ले जाती है।
मुनि श्री ने कहा कि बिना किसी व्यक्ति को जाने-समझे मित्रता नहीं करनी चाहिए। ऐसी मित्रता का परिणाम अंतत: केवल पछतावा होता है। उन्होंने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव सुख चाहता है, फिर भी अधिकांश लोग दुखी हैं। इसका प्रमुख कारण बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि स्वयं का गलत चुनाव और गलत संगति है। व्यक्ति को यह समझ होना चाहिए कि किससे मित्रता करनी है और किन लोगों2 से उचित दूरी बनाए रखनी है।
उन्होंने कहा कि जीवन में दु:ख का एक बड़ा कारण इंद्रिय सुखों की असीम आकांक्षा भी है। यदि वास्तव में सुखी रहना है तो इंद्रियों का दास बनने के बजाय उन पर विजय प्राप्त करनी होगी। इंद्रिय भोगों के पीछे भागने वाला व्यक्ति कभी स्थायी सुख प्राप्त नहीं कर सकता।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन में कभी भी मूर्ख व्यक्ति से मित्रता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि "ज्ञानी शत्रु भी हितकारी हो सकता है, लेकिन मूर्ख मित्र सदैव हानि पहुँचाता है। मूर्ख मित्र न तो आपकी बात समझता है और न ही सही मार्गदर्शन कर सकता है। उसके साथ रहने पर व्यक्ति सही होते हुए भी स्वयं को गलत साबित होते देखता है।
उन्होंने स्वार्थी लोगों से दूरी बनाए रखने की भी सीख दी। मुनि श्री ने कहा कि स्वार्थी व्यक्ति हर संबंध में केवल अपना हित देखता है। आप उसके लिए कितना भी त्याग कर लें, वह अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर आपकी भावना का सम्मान नहीं कर सकता।
मुनि श्री ने आगाह करते हुए कहा कि अधूरे ज्ञान वाले व्यक्ति से भी मित्रता नुकसानदायक होती है। अधूरा ज्ञान कई बार व्यक्ति को गलत दिशा में ले जाता है, जिसके दुष्परिणाम भविष्य में गंभीर हो सकते हैं। इसी प्रकार विवादित व्यक्तियों से मित्रता भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। ऐसे लोगों के साथ रहने से स्वयं भी अनावश्यक विवादों में घिरने की संभावना बनी रहती है।
उन्होंने व्यसनी लोगों की संगति से बचने का भी संदेश दिया। मुनि श्री ने कहा कि नशे और अन्य व्यसनों में लिप्त व्यक्ति के साथ रहने से धीरे-धीरे उसके संस्कार और आदतें भी जीवन में प्रवेश कर जाती हैं। इससे व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा और चरित्र दोनों प्रभावित होते हैं।
अपने प्रवचन के समापन में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में मित्रता सदैव सोच-समझकर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु से बड़ा और सच्चा मित्र कोई नहीं होता, क्योंकि गुरु ही ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर जीवन को सही दिशा और सच्चा मार्ग प्रदान करते हैं।
आयड़ समाज अध्यक्ष ओमप्रकाश चित्तौड़ा ने बताया कि प्रात:कालीन वेला में श्रीजी की शांतिधारा एवं अभिषेक जैसे मांगलिक आयोजन हुए जिनमें श्रावक- श्राविकाओं ने पुण्य लाभ लिया। धर्मसभा से पूर्व मुनिश्री के पाद प्रक्षालन दीक्षान्त हाड़ा- जयपुर, शास्त्र भेंट का पुण्य लाभ अजय कुमार तिताडिय़ा को मिला। इस दौरान नानालाल गनियावत, विजय कुमार तिताडिया, प्रेमप्रकाश तिताडिया, ओमप्रकाश- भगवतीलाल तिताडिया विपिन चित्तौड़ा, महावीर सिंघवी, राहुल जैन अंकित जैन उपस्थित थे। चित्तौड़ा को प्राप्त हुआ।
मुनिश्री रविवार को शीतलधाम में,भक्तामर विधान होगा
आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल अध्यक्ष सेक्टरा 11 के अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि मुनिश्री आदित्यसागरजी महाराज ससंघ रविवार प्रात: गाजे-बाज एवं श्रावक- श्राविकाओं के साथ भव्य शोभा यात्रा के रूप में श्रीजी की पालकी के साथ आयड़ चैत्यालय से विहार कर प्रात: 8 बजे खारा कुआ स्थित शीतलधाम पहुंचेगे। वहां पर विभिन्न मांगलिक आयोजनों के बाद प्रात: 9 बजे धर्मसभा होगा। उसके बाद दोपहर को भक्तामर विधान होगा जिसमें 151 जोड़े विधान का पुण्य लाभ लेंगे।