"एक शाम मुकेश के नाम" मुकेश के दर्द भरे गीतों से श्रोता हुए मंत्र मुग्ध जाने कहां गए वो दिन ,तुम बिन जीवन कैसे बीता ने बांधा समां पार्श्व गायक मुकेश को उनकी जयंती पर किया याद
By Goapl Gupta ·
23 Jul 2026 ·
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"एक शाम मुकेश के नाम" मुकेश के दर्द भरे गीतों से श्रोता हुए मंत्र मुग्ध
जाने कहां गए वो दिन ,तुम बिन जीवन कैसे बीता ने बांधा समां
पार्श्व गायक मुकेश को उनकी जयंती पर किया याद
उदयपुर। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक मुकेश चंद्र माथुर की जयंती के अवसर पर अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान में "एक शाम मुकेश के नाम" संगीतमय संध्या का आयोजन बुधवार शाम 5 बजे संस्थान परिसर, हरियाली रेस्टोरेंट एवं होटल मुकुंद विलास के मध्य, गुलाब बाग रोड, उदयपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रदीप शर्मा एवं पारस हॉस्पिटल की डॉक्टर रेणु मिश्रा थे। विशिष्ठ अतिथि शहर के संगीतज्ञ जीवन लाल कॉलेट थे।
निदेशक विवेक अग्रवाल ने बताया कि शहर के ओमप्रकाश टांक ने अपने गायन की शुरुआत सर्वप्रथम नमः शिवाय भजन हरि नाम संकीर्तन और हरे कृष्ण महामंत्र कीर्तन से की। के इसके बाद उन्होंने फिल्म मेरा नाम जोकर से जाने कहां गए वो दिन ,राम कहे ऐसा हो जाए, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, तुम बिन जीवन कैसे बीता पूछो मेरे दिल से, कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है उन्होंने इस अवसर पर श्रोताओं की फरमाइश को देखते हुए जगजीत सिंह की नज्म बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी एवं कहीं दूर जब दिन ढल जाए, तत्पश्चात उन्होंने मुकेश के एक से बढ़कर एक सदाबहार अमर गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी।
इस विशेष आयोजन में शहर के सुप्रसिद्ध संगीत साधक एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी ओमप्रकाश टांक अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को स्वर्णिम फिल्म संगीत के दौर में ले गए।
अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक विवेक अग्रवाल ने बताया कि ओमप्रकाश टांक वर्षों से संगीत साधना में निरंतर सक्रिय हैं। वे मधुर एवं प्रभावशाली आवाज़ के धनी होने के साथ-साथ उत्कृष्ट ग़ज़ल गायक, फिल्मी गीतों के सशक्त प्रस्तुतकर्ता, भावपूर्ण भजन गायक तथा कराओके सिंगिंग के कुशल कलाकार हैं। इसके साथ ही वे सितार, गिटार वादन में भी विशेष दक्षता रखते हैं और मंच पर अपनी आकर्षक एवं जीवंत प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनकी गायकी में सुर, भाव, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला है। जिसके कारण वे संगीत प्रेमियों के बीच विशेष पहचान रखते हैं।
कार्यक्रम में मुकेश के कालजयी एवं सदाबहार गीतों की संगीतमय संजीव प्रस्तुति दी। श्रोताओं को स्वर्णिम फिल्म संगीत की मधुर स्मृतियों से रूबरू हुए । कोरियोग्राफर निकिता अग्रवाल और महेंद्र कुमार वर्मा ने सभी का स्वागत किया।
इस अवसर पर शहर के कई जाने-माने वरिष्ठ सीनियर नागरिकों संगीत प्रेमियों गायक कलाकारों ने बहुत ही उत्साह के साथ भाग लिया और कार्यक्रम को ऊंचाइयों पर ले गए।
इससे पूर्व संस्थान के प्राचार्य महेंद्र कुमार वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और अपने उद्बोधन में कहा कि मुकेश चंद्र माथुर का जन्म 22 जुलाई को हुआ था और वे प्रसिद्ध गायक कलाकार के रूप अपनी पहचान के लिए जान गए उन्होंने कई दर्द भरे और मानव हृदय को छूने वाले गीत गाकर लंबे समय तक अपने चाहने वालों के दिलों पर राज किया।