ShubhBhaskar
JANTANTRAKI AWAZ
E Paper

पंचायत भवन में कवरेज के दौरान पत्रकार से मारपीट का आरोप, एससी/एसटी एक्ट सहित मामला दर्ज; पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर हुई तेज*

By Goapl Gupta · 25 Jul 2026 · 224 views
*पंचायत भवन में कवरेज के दौरान पत्रकार से मारपीट का आरोप, एससी/एसटी एक्ट सहित मामला दर्ज; पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर हुई तेज*
रिपोर्टर:-(शिंभू सिंह शेखावत) जनतंत्र की आवाज, राजस्थान
उदयपुरवाटी तहसील के गुढ़ा थाना क्षेत्र के ककराना गांव में ग्रामीण सेवा शिविर की कवरेज के दौरान एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
एफआईआर के अनुसार, काकराना निवासी पत्रकार सुमेर सिंह तूनवाल 22 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे पंचायत भवन में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर की कवरेज कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान गांव के मातादीन दायमा वहां पहुंचे और कथित रूप से पत्रकार का मोबाइल व आधार कार्ड छीन लिया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई तथा सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने जाते समय जान से मारने की धमकी दी।
गुढ़ा थाना पुलिस ने परिवादी की रिपोर्ट पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 126(2), 351(2), 352 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) एवं 3(2)(va) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक व्यक्ति पर कथित हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उस स्तंभ पर चिंता का विषय है जिसे "चौथा स्तंभ" कहा जाता है। पत्रकार समाज और शासन-प्रशासन के बीच सूचना का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। वे भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं, सरकारी योजनाओं और सामाजिक मुद्दों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर पत्रकारों के साथ मारपीट, धमकी, झूठे मुकदमे और उत्पीड़न जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
*पत्रकार सुरक्षा कानून की बढ़ी मांग*
पत्रकार संगठनों का लंबे समय से कहना है कि जिस प्रकार लोकतंत्र के अन्य संस्थानों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार पत्रकारों के लिए भी प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाना चाहिए। साथ साथ ही निष्पक्ष जांच दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तथा स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
*एक जुटता की भी जरूरत*
पत्रकारों का मानना है कि किसी भी संस्था या विचारधारा से जुड़े होने के बावजूद पत्रकारों को ऐसे मामलों में एकजुट होकर साथी पत्रकारों के समर्थन में खड़ा होना चाहिए आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पत्रकारिता की गरिमा और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है।
*जनहित में उठे ठोस कदम*
यदि केंद्र और राज्य सरकारी सुशासन तथा जीरो स्टार लेंस की नीति पर कार्य कर रही है तो ईमानदारी से जनहित में काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को निश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है पत्रकारों पर होने वाले हमले पर त्वरित कार्यवाही दोषियों को कड़ी सजा और सुरक्षा संबंधी स्पष्ट कानून लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube