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समय पर ठोस निर्णय लेने की क्षमता ही जीवन के दुखों को दूर करती है : मुनि श्री आदित्य सागर

By Goapl Gupta · 25 Jul 2026 · 7 views
समय पर ठोस निर्णय लेने की क्षमता ही जीवन के दुखों को दूर करती है : मुनि श्री आदित्य सागर

उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल। हिरण मगरी सेक्टर-11 स्थित सवीना स्थित संभावनाथ कॉम्प्लेक्स में आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार का प्रत्येक कार्य करना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन उसके लिए सही समय पर सही निर्णय लेना सबसे कठिन होता है। उन्होंने कहा कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी कारण से दुखी है और दुखों के अनेक कारणों में सबसे बड़ा कारण समय पर उचित निर्णय लेने की क्षमता का अभाव है।
मुनि श्री ने कहा कि अनेक लोग समय पर निर्णय नहीं ले पाते। उनके विचार बार-बार बदलते रहते हैं और जब तक वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं, तब तक अवसर हाथ से निकल चुका होता है। यदि जीवन से दुखों को दूर करना है तो व्यक्ति को स्वयं में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की कला अभ्यास और अनुभव से विकसित होती है। यदि व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं है तो उसे किसी योग्य नेतृत्व का अनुसरण करना चाहिए। वहीं, यदि वह किसी का अनुसरण नहीं करना चाहता तो उसे अपने भीतर ही नेतृत्व के गुण विकसित करने होंगे। विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते हुए ही व्यक्ति की निर्णय क्षमता मजबूत बनती है।
मुनि श्री ने कहा कि आज का युवा वर्ग निर्णय लेने की क्षमता में अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देता है। निर्णय लेना भी एक कला है, जिसे छोटे-छोटे निर्णयों से प्रारंभ कर धीरे-धीरे बड़े निर्णयों तक पहुंचकर सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, शांत चित्त और सकारात्मक सोच के साथ लिया गया निर्णय सदैव ठोस और सफल होता है, जबकि अशांत मन से लिया गया निर्णय प्राय: असफल सिद्ध होता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी गलतियों के साथ-साथ दूसरों के अनुभवों और त्रुटियों से सीखकर भी स्वयं को निर्णायक बना सकता है। संघर्षपूर्ण परिस्थितियां भी व्यक्ति को मजबूत निर्णयकर्ता बनाती हैं। मुनि श्री ने धर्म और पुण्य के मार्ग को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्ममय जीवन से विचार शुद्ध होते हैं, मन शांत रहता है और व्यक्ति सही समय पर उचित एवं दृढ़ निर्णय लेने में सक्षम बनता है। ऐसी निर्णय क्षमता विकसित होने पर जीवन में दुखों का स्थान समाप्त हो जाता है तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
पारस चित्तौड़ा ने बताया कि बताया कि प्रात:कालीन बेला में भगवान की शांतिधारा एवं अभिषेक सहित विभिन्न मांगलिक आयोजन संपन्न हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने पुण्य लाभ प्राप्त किया। धर्मसभा से पूर्व मुनिश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं आरती के मुख्य आयोजन हुए। सम्पूर्ण मांगलिक आयोजनों के दौरान इस दौरान महावीर सिंघवी, पुष्कर भदावत, रोशन देवड़ा, किशोरा बोरा मुख्य रूप से उपस्थित थे।
रविवार को मुनिश्री का होगा आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में मंगल प्रवेश:
चित्तौड़ा ने बताया कि रविवार सवेरे 7 बजे सकल दिगम्बर जैन समाज एवं आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में शोभा यात्रा के साथ मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ सम्भवनाथ कॉम्पलेक्स से विहार कर प्रात: 8 बजे आदिनाथ भवन सेक्टर 11 पहुंचेंगे। यहां पर समाजजनों द्वारा मुनिश्री संघ की भव्य आगवानी की जाएगी।

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