राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा जारी होने वाले दास्तावेजो में 1 जनवरी 2026 से क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू, एक क्लिक पर उपलब्ध होगा विद्यार्थी का सारा डाटा*
By Goapl Gupta ·
31 Dec 2025 ·
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*राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा जारी होने वाले दास्तावेजो में 1 जनवरी 2026 से क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू, एक क्लिक पर उपलब्ध होगा विद्यार्थी का सारा डाटा*
*क्यूआर कोड डिजिटल इंडिया की संकल्पना को साकार करने की दिशा में आरटीयू का महत्वपूर्ण कदम : प्रो. निमित चौधरी, कुलगुरु*
कोटा, 31 दिसंबर, दस्तावेजों के सुगम प्रमाणीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता, पारदर्शिता एवं डिजिटल सत्यापन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय से जारी होने वाली सभी डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट एवं माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर क्यूआर कोड (QR Code) प्रणाली को 1 जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया है। आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि
वर्ष 2026 से जारी होने वाले सभी दस्तावेजो पर क्यूआर कोड अंकित होगा। अब क्यूआर कोड के माध्यम से संबंधित शैक्षणिक दस्तावेज़ों का ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकेगा। कोई भी संस्थान, नियोक्ता अथवा छात्र क्यूआर कोड स्कैन कर दस्तावेज़ की वैधता, जारी तिथि, पाठ्यक्रम विवरण एवं अन्य सभी आवश्यक जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह पहल डिजिटल इंडिया के तहत पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेज़ों के दुरुपयोग और जालसाजी पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
*कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि* विश्वविद्यालय छात्र सेवाओं को और अधिक डिजिटल व सुगम बनाने के लिए संकल्पित है। यह नवाचार हमारे शैक्षणिक तंत्र को डिजिटल, पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। वर्तमान समय डिजिटल तकनीक का युग है। ऐसे में शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता, सुरक्षा और त्वरित सत्यापन एक बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से अब किसी भी प्रमाण पत्र को आसानी से स्कैन कर उसकी वैधता की तुरंत पुष्टि की जा सकेगी। इससे न केवल छात्रों को सुविधा मिलेगी, बल्कि नियोक्ताओं, उच्च शिक्षण संस्थानों और अन्य संबंधित संगठनों को भी लाभ होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यवस्था हमारे छात्रों के भविष्य को और अधिक सुरक्षित बनाएगी तथा विश्वविद्यालय की साख को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगी। क्यूआर कोड लागू करना एक आधुनिक, उपयोगी और भविष्य उन्मुख निर्णय है, जो शिक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाता है। क्यूआर (QR) कोड लागू किया जाना एक सकारात्मक और सराहनीय कदम है।
*परीक्षा नियंत्रक डॉ विवेक पांडे ने कहा कि* डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की भावना के अनुरूप यह पहल फर्जी दस्तावेज़ों पर रोक लगाने, प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने और समय व संसाधनों की बचत करने में सहायक सिद्ध होगी। आरटीयू तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, पारदर्शिता और गुणवत्ता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है। भविष्य में भी हम आधुनिकतम नवाचार के माध्यम से छात्र हित में ऐसे अनेक सकारात्मक कदम उठाते रहेंगे। त्वरित दस्तावेज सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्ड का संधारण, सत्यापन में समय और लागत की बचत के साथ नियोक्त को भी आसानी होगी। विदेशी यूनिवर्सिटी, भर्ती और जाँच एजेंसीज, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ QR कोड वाले दस्तावेज़ों को ज्यादा भरोसेमंद मानती हैं क्योंकि वे तुरंत ऑनलाइन वेरिफाई हो जाते हैं। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी साथ ही, यह व्यवस्था डिजिटल इंडिया जैसी पहल को भी समर्थन देती है और समय व लागत की बचत करती है।
गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं तकनीकी शिक्षा विभाग राजस्थान द्वारा जारी के निर्देशों के अनुरूप राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ने इस व्यवस्था को विश्वविद्यालय में क्रियान्वित किया है। भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वाले अभ्यर्थीयों के कई मामलों में संदिग्ध दस्तावेज सामने आते रहे है। इनकी जांच में काफी समय लगता है। भर्ती संस्थान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की पुष्टि एक क्लिक पर संबंधित विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से सीधे कर सकेंगे। इससे भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और दस्तावेजों में विसंगतियों को पकड़ा जा सकेगा। डिग्री और सर्टिफिकेट पर प्रिंट किए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही अभ्यर्थी का पूरा रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के डेटाबेस से मिलान किया जा सकेगा।