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खुदरा उर्वरक विक्रेता प्राधिकार-पत्र प्रशिक्षण सम्पन्न

By Goapl Gupta · 31 Dec 2025 · 8 views
खुदरा उर्वरक विक्रेता प्राधिकार-पत्र प्रशिक्षण सम्पन्न

उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज। प्रसार शिक्षा निदेशालय, उदयपुर द्वारा आयोजित 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण दिनांक 15 दिसम्बर से 29 दिसम्बर, 2025 तक किया गया। इस प्रशिक्षण का समापन दिनांक 29 दिसम्बर, 2025 को मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक डॉ. आई.जे. माथुर, प्रसार शिक्षा निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के सानिध्य में किया गया। डॉ. माथुर ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षणार्थियों से आव्ह्ान किया कि वे सच्ची निष्ठा से अपने व्यवसाय के साथ किसानों को सही सुझाव देकर अप्रत्यक्ष रूप से उनके लिए बदलाव अभिकर्त्ता के रूप में सहायता करें। डॉ. माथुर ने प्रतिभागियों से बात करते हुये कस्टमाईज उर्वरक, संतुलित उर्वरक एवं समन्वित उर्वरक प्रबन्धन के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला और नैनो फर्टिलाईजर एवं जल में घुलनशील उर्वरकों के महत्व पर चर्चा की। उन्होनें कृषि के छः प्रमुख आयामों यथा मिट्टी, पानी, बीज, औजार, वातावरण एवं किसान के बारे में भी बताया और कहा कि किसान सर्वोपरी है और उसको ध्यान में रखते हुए उर्वरक विक्रेताओं को अपनी तैयारी करनी चाहिये।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. आर. एल. सोनी, निदेशक प्रसार शिक्षा, उदयपुर ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षणार्थियों को सफल व्यवसाय करने की जानकारी दी। उन्होनें बताया कि विक्रेताओं को किसानों के साथ अच्छे रिश्ते, मधुर व्यवहार रखना चाहिये। साथ ही सभी प्रकार के उत्पाद सही दाम पर किसानों को उपलब्ध करवाने की सलाह दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.सी. गोयल, निदेशक आवसीय निर्देशन, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के उपरान्त सभी उर्वरक विक्रेताओं को किसानों से सीधा सम्पर्क स्थापित कर विभिन्न प्रकार की नवीनतम एवं आधुनिक कृषि तकनीकियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए और उनकी आमदनी को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही डॉ. गोयल ने छः जे का सिद्धान्त जल, जंगल, जमीन, जन, जीवन, जागरूकता की अवधारणा को विस्तृत रूप से साझा किया। इस प्रशिक्षण के समन्वयक एवं आचार्य डॉ. योगेश कनोजिया ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं मृदा परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पोषक तत्व प्रबंधन, समन्वित पोषक तत्व के लाभ, जैविक खेती और उसके लाभ, कार्बनिक खेती आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। उक्त प्रशिक्षण के समापन समारोह में खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये तथा इस प्रशिक्षण में राज्य के विभिन्न जिलों के कुल 45 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया जिन्हें सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक जानकारियां विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों एवं राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई।
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