वीतराग विज्ञान पाठशाला में बच्चों को दी गई पूजन-विधि की व्यावहारिक एवं संस्कारपरक शिक्षा
By Goapl Gupta ·
13 Jan 2026 ·
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वीतराग विज्ञान पाठशाला में बच्चों को दी गई पूजन-विधि की व्यावहारिक एवं संस्कारपरक शिक्षा
उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज विवेक अग्रवाल।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर–11, उदयपुर में संचालित वीतराग विज्ञान पाठशाला के संचालनकर्ता डॉ. निलेश शास्त्री ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रत्येक रविवार को बच्चों हेतु धार्मिक, नैतिक एवं संस्कारात्मक शिक्षा का सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली संचालन किया जा रहा है। इस पाठशाला का उद्देश्य बालकों में धर्मबोध, सदाचार, अनुशासन एवं जीवन-मूल्यों का सुदृढ़ बीजारोपण करना है, जिससे वे सम्यक् दृष्टि के साथ जीवन-पथ पर अग्रसर हो सकें।
उन्होंने बताया कि यह पाठशाला छह कक्षाओं में विभाजित होकर संचालित होती है, जहाँ बच्चों की आयु एवं बौद्धिक स्तर के अनुरूप उन्हें जैन धर्म के विविध विषयों—धार्मिक शिक्षा, नैतिक मूल्यों, जीवन-व्यवहार एवं संस्कारों—से क्रमबद्ध रूप से परिचित कराया जाता है। प्रत्येक रविवार को किसी न किसी महत्वपूर्ण धार्मिक विषय को केंद्र में रखकर बच्चों को सरल, रोचक एवं व्यवहारिक शैली में मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
इसी क्रम में आज आयोजित विशेष पूजन प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर जयपुर से पधारे विद्वान पं. विपिन लुहाड़िया का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिससे कार्यक्रम की आध्यात्मिक गरिमा, गंभीरता एवं प्रभावशीलता और अधिक बढ़ गई। उनके सान्निध्य में बच्चों को पूजन-विधि को समझने एवं आत्मसात करने का विशेष लाभ प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिनेंद्र भगवान के विनय पाठ के साथ हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिभाव एवं श्रद्धा से ओतप्रोत हो गया। तत्पश्चात पूजा पीठिका का विधान संपन्न कराया गया। इसके बाद समुच्चय पूजन के अंतर्गत देव–शास्त्र–गुरु, अनंता–अनंत सिद्ध परमेष्ठी भगवान एवं विद्यमान तीर्थंकर भगवान की विधिपूर्वक पूजा कराई गई। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ किया गया।
इस अवसर पर बच्चों को अष्टद्रव्य पूजन, पूजन के पाँच अंग, मंदिर में प्रवेश की मर्यादाएँ, शुद्ध आचरण, भाव-शुद्धि एवं पूजन की संपूर्ण पद्धति को विस्तारपूर्वक समझाया गया। बच्चों ने शुद्ध धोती एवं दुपट्टा धारण कर अत्यंत अनुशासन, श्रद्धा एवं उत्साह के साथ पूजन-विधि को न केवल देखा बल्कि उसे आत्मसात भी किया, जिससे उनके मन में धर्म के प्रति गहरी आस्था एवं संस्कारों का सुदृढ़ विकास हुआ।
पाठशाला के नियमित एवं निःस्वार्थ संचालन में जिन समर्पित शिक्षकों का सतत सहयोग प्राप्त होता है, उनमें पं. संदीप शास्त्री, पं. दीपक शास्त्री, डॉ. निलेश शास्त्री, श्रीमती आशा सिंघवी, श्रीमती दीप्ति मेहता एवं श्रीमती ममता डूंगरिया प्रमुख हैं। साथ ही बच्चों की प्रेरणा एवं प्रभावना हेतु सदैव तत्पर श्री दीपक भादावत का भी सराहनीय योगदान उल्लेखनीय है।
वीतराग विज्ञान पाठशाला का यह निरंतर प्रयास है कि बालकों में केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि शुद्ध आचरण, संयम, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का सर्वांगीण विकास हो, ताकि वे भावी समाज के लिए सुसंस्कारित, जागरूक एवं प्रेरणास्रोत नागरिक बन सकें।