अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की आरटीयू इकाई ने कर्तव्यबोध दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया*
By Goapl Gupta ·
28 Jan 2026 ·
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*अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की आरटीयू इकाई ने कर्तव्यबोध दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया*
*कर्तव्य बोध केवल एक विचार नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी : प्रो. साहू*
*शिक्षकों के अधिकारों का आधार ही उनके कर्तव्य है, विकसित भारत के लिए जरूरी है नागरिक कर्तव्य—कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी*
कोटा, 28 जनवरी, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्याल में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) की आरटीयू इकाई की ओर से कर्तव्यबोध दिवस का आयोजन किया गया। सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सेवानिवृत्त प्रकोष्ठ के संयोजक एवं भारतीय इतिहास संकलन योजना के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रोफेसर मोहनलाल साहू उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रो. साहू ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों और महापुरुषों के योगदान से दूर होती जा रही है, ऐसे में उन्हें स्मरण कर उनके विचारों को समाज तक पहुँचाना शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों का कर्तव्य है। प्रो. साहू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कर्तव्यबोध, राष्ट्रभक्ति और समर्पण के उदाहरण देकर युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने महापुरुषों से प्रेरणा लेकर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेना चाहिए। वर्तमान समय में कर्तव्य बोध केवल एक विचार नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक और नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिक्षक समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। यदि शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार और सजग रहेगा, तो समाज स्वतः ही सशक्त और संस्कारवान बनेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि आज के परिवेश में कर्तव्यबोध को जगाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने देश की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए आधुनिक भारत के महान व्यक्तित्व के आदर्शों को राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण बताया। प्रो. चौधरी ने कहा कि राष्ट्र उन्नति के लिए समाज में संवेदनशीलता, सजगता और सकारात्मक योगदान आवश्यक है।वर्तमान शैक्षिक परिवेश में शिक्षकों को अनेक नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मेंकर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और सकारात्मक सोच ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है। शिक्षक यदि स्वयं आदर्श बनेगा, तभी छात्र उससे प्रेरणा ग्रहण कर पाएंगे।वर्तमान शैक्षिक परिवेश में शिक्षकों को अनेक नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।ऐसे में कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और सकारात्मक सोच ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है। शिक्षक यदि स्वयं आदर्श बनेगा, तभी छात्र उससे प्रेरणा ग्रहण कर पाएंगे।
डीन डीन फैकल्टी अफेयर्स डॉ. दिनेश बिरला ने कहा कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य शिक्षक समाज, शिक्षाविदों एवं प्रबुद्ध नागरिकों में कर्तव्य, राष्ट्रबोध, नैतिक मूल्यों, शैक्षिक तथा सामाजिक दायित्व के प्रति जागरूकता को और अधिक मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य बोध दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका को पुनः स्मरण कराने का सशक्त माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। कार्यक्रम में डीन डीन फैकल्टी अफेयर्स डॉ.दिनेश बिरला, विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्षगण, शिक्षकगण, शोधार्थी, अधिकारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संगठन की तरफ से डॉ. दिनेश विश्नोई, डॉ. दीपक भाटिया एवं अंशुल बंसल उपस्थित थे।