वैयक्तिक और राष्ट्रीय चरित्र समय की आवश्यकता -कटारिया*
By Goapl Gupta ·
29 Jan 2026 ·
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*वैयक्तिक और राष्ट्रीय चरित्र समय की आवश्यकता -कटारिया*
उदयपुर संवाददाता जनतंत्र की आवाज। भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा आबादी वाला देश है।यह आबादी राष्ट्र की शक्ति बने,इस दृष्टि से शिक्षण संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।युवा नैतिक रूप से तो चरित्रवान हो ही,राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भावना के साथ उनका राष्ट्रीय चरित्र भी उज्ज्वल हो,यह सुनिश्चित होना आवश्यक है।उक्त विचार विश्व हिंदू परिषद् के प्रांत सह संयोजक सुंदर लाल कटारिया ने व्यक्त किए।वे बुधवार को आर्ट्स कॉलेज में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ विवि इकाई की ओर से आयोजित कर्तव्य बोध कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।उन्होंने कहा कि हमें अभी तक केवल गुलामी का इतिहास ही पढ़ाया गया जिससे कि हमारे मन में हीनता का भाव बना रहे जबकि भारत का सही इतिहास सतत संघर्ष,त्याग और स्वाभिमान का इतिहास रहा है जिससे आज की पीढ़ी को अवगत करवाना आवश्यक है।महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,भगत सिंह,चंद्रशेखर आजाद,गोविंद गुरु,गुरु गोविंद सिंह,रानी अहिल्या बाई,रानी लक्ष्मी बाई,मीरा, पन्नाधाय आदि के कृतत्व से संपूर्ण समाज को अवगत करवाया जाना चाहिए।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए आर्ट्स कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि हम अधिकारों के प्रति जितने सजग है,उतनी सजगता अपने उत्तरदायित्वों के लिए भी रखनी होगी,तभी समरस एवं सशक्त समाज का निर्माण हो सकेगा।भारत का समाज मूल रूप से कर्तव्य आधारित समाज ही रहा है जिसके कारण संयुक्त परिवार जैसी संरचनाएं आज भी विद्यमान है। अपः दीपो भवः भारत की चिंतन परम्परा रही है, अतः समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भावना हमारी आदत का हिस्सा होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विवि इकाई अध्यक्ष प्रो दिग्विजय भटनागर ने कहा कि पालन पोषण की हमारी व्यवस्था ने समाजिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लेकिन अब माता पिता भी केवल कैरियर निर्माण के उपकरण मात्र बनते जा रहे है जबकि उन्हें भावी पीढ़ी को संस्कारित करने पर ध्यान देना चाहिए।एक अच्छा इंसान बनना बुनियादी आवश्यकता है,जिसके माध्यम से हम सभी तरह की समस्याओं का सामना कर सकते है।
संगठन के प्रदेश सचिव डॉ बालू दान बारहठ ने बताया कि एबीआरएसएम प्रतिवर्ष प्रत्येक इकाई पर कर्तव्य बोध कार्यक्रम का आयोजित करता है जिसके पीछे मूल भावना यह है कि शिक्षक केवल अपने अधिकारों एवं मांगों को लेकर ही सजग नहीं है अपितु अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतना ही सजग है।संगठन शिक्षा को संपूर्णता की दृष्टि से देखता है इसलिए राष्ट्र के हित ने शिक्षा,शिक्षा के हित में शिक्षक एवं शिक्षक के हित में समाज के ध्येय वाक्य के साथ संगठन कार्य करता है।कार्यक्रम में सह अधिष्ठाता डॉ नवीन नंदवाना, डॉ सिद्धार्थ शर्मा, डॉ विपिन खोखर, डॉ चेतना आमेटा, डॉ टीकम चंद, डॉ दीपा सोनी, डॉ विनीता राजपुरोहित, डॉ मनीष श्रीमाली, डॉ पारुल त्यागी, डॉ मोहित गोखरू, डॉ आशीष सिसोदिया सहित अनेक संकाय सदस्य एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।