प्रदेश के दुर्गम स्थानों पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय उपलब्ध संसाधनों एवं उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद खुलेंगे
By Goapl Gupta ·
29 Jan 2026 ·
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प्रदेश के दुर्गम स्थानों पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय उपलब्ध संसाधनों एवं उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद खुलेंगे-- कैलाश चंद्र कौशिक
जयपुर, 29 जनवरी। राजस्थान सरकार के विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम स्थानों पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय खोलने के लिए उपलब्ध संसाधनों एवं उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद गंभीरता से प्रयास किये जायेगें।
विधि एवं विधिक कार्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री जब्बर सिंह सांखला द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन को त्वरित, सुलभ और निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में विधि एवं विधिक कार्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में बदनोर में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय (मुंसिफ कोर्ट) की स्थापना का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, क्योंकि बदनोर क्षेत्र के सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय स्तर के सुनवाई योग्य लंबित प्रकरणों की संख्या 812 हैं जो राज्य सरकार द्वारा इस स्तर के न्यायालय की स्थापना हेतु निर्धारित मानदण्ड 1700-2000 प्रकरणों से बहुत कम है।