राजस्थानी भाषा के शोधार्थी और व्याख्याता डॉ. गौरीशंकर प्रजापत का अभिनंदन समारोह आयोजित*
By Goapl Gupta ·
31 Jan 2026 ·
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*राजस्थानी भाषा के शोधार्थी और व्याख्याता डॉ. गौरीशंकर प्रजापत का अभिनंदन समारोह आयोजित*
बीकानेर/ शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान, बीकानेर के तत्वावधान में राजस्थानी भाषा के शोधार्थी एवं व्याख्याता डॉ.गौरीशंकर प्रजापत की राजस्थानी भाषा-साहित्य की लगातार सेवाओं को मध्य नजर रखते हुए अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने की, जबकि मुख्य अतिथि साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार एवं विशिष्ट अतिथि व्यंग्यकार-संपादक डॉ. अजय जोशी थे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेन्द्र जोशी ने डॉ. प्रजापत के शोधपूर्ण कार्यों की सराहना करते हुए राजस्थानी भाषा के संवर्धन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रजापत राजस्थानी के प्रमुख शोधार्थी एवं व्याख्याता हैं, जिनके कार्यों ने राजस्थानी साहित्य को समृद्ध किया है।
मुख्य अतिथि राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि राजस्थानी साहित्य की मरुस्थली में डॉ. गौरीशंकर प्रजापत जैसे शोधार्थी ही वह ओस की बूँद हैं जो साहित्य-संस्कृति को हरा-भरा रखती है। उनके कार्यों ने राजस्थानी भाषा को नई व्याख्या दी है, जो लोक से शास्त्रीय तक फैली हुई है। स्वर्णकार ने कहा कि राजस्थानी साहित्य की थाती को समृद्ध करने वाले उनके शोध और व्याख्यान राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने न केवल भाषा के गहन अध्ययन से नई दिशाएँ खोलीं, बल्कि युवा पीढ़ी को राजस्थानी संस्कृति से जोड़ने का पथ भी प्रशस्त किया।
डॉ. जोशी ने कहा कि राजस्थानी साहित्य की थाती को समृद्ध करने वाले उनके शोध और व्याख्यान राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने न केवल भाषा के गहन अध्ययन से नई दिशाएँ खोलीं, बल्कि युवा पीढ़ी को राजस्थानी संस्कृति से जोड़ने का पथ भी प्रशस्त किया। डॉ. जोशी ने कहा कि डॉ. प्रजापत के शोध ने भाषा को आधुनिक संदर्भ दिया, जो संस्कृति के संरक्षण में मील का पत्थर है।
गौरीशंकर प्रजापत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से डॉ.प्रशांत बिस्सा ने प्रकाश डाला।
अभिनंदन पत्र का वाचन प्रेरणा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रेमनारायण व्यास ने किया।
अभिनंदन समारोह में अतिथियों ने डॉ. प्रजापत को शाल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया।
सम्मान के प्रति उत्तर में डॉ.गौरीशंकर प्रजापत ने राजस्थानी भाषा की मान्यता की पुरजोर मांग रखी। अभिनंदन समारोह में शहर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित हुए।