गजनेर में हुआ छंगाणी के कविता संग्रह 'ई बात रो झोड़ है' का भव्य लोकार्पण
By Goapl Gupta ·
09 Feb 2026 ·
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गजनेर में हुआ छंगाणी के कविता संग्रह 'ई बात रो झोड़ है' का भव्य लोकार्पण
बीकानेर। हिन्दी राजस्थानी के हास्य- व्यंग्य कवि बाबूलाल छंगाणी 'बम चकरी' के सद्य प्रकाशित राजस्थानी कविता संग्रह 'ई बात रो झोड़ है' का लोकार्पण रविवार को गजनेर के झंवर पैलेस के सभागार में हुआ। बीकानेर के गायत्री प्रकाशन की ओर से प्रकाशित इस कविता संग्रह के विमोचन समारोह की अध्यक्षता करते वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य 'आशावादी' ने कहा कि बाबूलाल छंगाणी को केवल हास्य कवि कहना उनके बहुआयामी सृजन को सीमित करने जैसा है। छंगाणी की रचनाओं में गहरी संवेदन है। उन्होंने कहा कि वे अपनी कविताओं में समकालीन समाज को उकेरते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कवि कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि गजनेर के जाये- जन्मे बाबूलाल छंगाणी आज की दिनांक में बीकानेर में अपनी पीढ़ी के इकलौते हास्य-व्यंग्य कवि हैं। इनकी कविताएँ शुद्ध हास्य के साथ ही करारे कटाक्ष भी करती हैं। जोशी ने कहा कि छंगाणी ने बड़े मंचों पर प्रस्तुति देकर बीकानेर को गौरवान्वित किया है। कवि- नाटककार एवं पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि जितनी सहजता बाबूलाल छंगाणी के व्यवहार में है, उतनी ही सहजता उनके सृजन में भी देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि छंगाणी की कविताओं का फलक बहुत बड़ा है और उनकी भाषा अथवा कथ्य में जरा भी बनावटीपन नहीं है। कवयित्री मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि बाबूलाल छंगाणी ने ग्रामीण परिवेश से उठकर साहित्य जगत में अपनी पुख्ता पहचान बनाई है, उनकी कविताएँ समाज में घटित हुए घटनाक्रम को दर्पण की तरह दिखाती हैं। वरिष्ठ राजस्थानी कवि शंकर सिंह राजपुरोहित ने कहा कि उनकी कविता द्विअर्थी पंक्तियों और फूहड़ता से सर्वथा मुक्त है, कविताओं में मिश्रित व्यंग्य उनके हास्य को बहुत प्रभावी बना देता है। स्वागत उद्बोधन देते हुए नवलाराम कुम्हार ने कहा कि बाबूलाल छंगाणी की कविताएं रंजन करने के साथ ही जीवन के जरूरी विषयों पर चिन्तन के लिए आमंत्रित करती है। वरिष्ठ कवि- कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कवि छंगाणी का परिचय देते हुए उन्हें बहुआयामी सशक्त रचनाकार बताया। कार्यक्रम संयोजक कवि- पत्रकार संजय आचार्य 'वरुण' ने कहा कि छंगाणी की कविताओं में जीवन के सभी रंग देखे जा सकते हैं, उनकी व्यंग्यात्मक कविताएँ समाज की विकृतियों और विसंगतियों पर करारी चोट करती हैं। जयकिशन सादाणी और चम्पालाल शर्मा ने गजनेर के जाये- जन्मे छंगाणी के साहित्य जगत में उत्तरोत्तर आगे बढ़ने की कामना की। कवि बाबूलाल छंगाणी ने कहा कि बीकानेर के साहित्य जगत ने सदैव उनका स्नेह भरा मार्गदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि मेरा कविता कर्म मुझे जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में ऊर्जा प्रदान करता है और उत्साहित बनाए रखता है। डाकघर के अधीक्षक राम अवतार सोनी ने कहा कि डाक विभाग गौरवान्वित है कि बाबूलाल छंगाणी अपने कर्म को पूरी निष्ठा से करते हुए रचनात्मक जीवन भी जी रहे हैं। इस अवसर पर बीकानेर के पोस्ट मास्टर विशाल भारद्वाज एवं गजनेर के रूपचन्द्र शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पुस्तक लोकार्पण के पश्चात कवि बाबूलाल छंगाणी ने अपनी काव्य कृति 'ई बात रो झोड़ है' की प्रति अपनी माताजी कमला देवी छंगाणी के साथ ही राजेन्द्र कुमार छंगाणी, केदार चाण्डक, नवलाराम कुम्हार, दाऊलाल ओझा, गवरा ओझा, एडवोकेट शिवम उपाध्याय, कन्हैयालाल पांडे एवं दामोदर माहेश्वरी को भेंट की। कार्यक्रम में गायत्री प्रकाशन, बीकानेर की ओर से कन्हैयालाल पांडे, डॉ. हरिदास हर्ष, विशाल भारद्वाज, डॉ. पंकज, डॉ. मनस्विनी, पम्मी कोचर, रामेश्वर बाड़मेरा 'साधक', शमीम अहमद शमीम, रेवन्तराम, घनश्याम कबीर, राधेश्याम बोबरवाल और राम अवतार सोनी को साहित्य वार्षिकी कथारंग का लोक पर केन्द्रित अंक भेंट किया गया। कार्यक्रम में गायत्री प्रकाशन की श्रीमती गायत्री शर्मा, मधुसूदन सोनी, चित्रकार धर्मा, कृष्णा वर्मा, मधुरिमा सिंह, भगवाना राम, सुरजाराम गेधर, रामकिसन भूतड़ा, कन्हैयालाल बड़गूजर, सांवरलाल कुम्हार, भंवरजी मास्टर, ताराचंद गोदारा, हरिकिशन बोबरवाल, भरत सोलंकी, रामनारायण शर्मा, सुरजाराम मेडिकल, हिमांशु आचार्य, घनश्याम उपाध्याय, शायर कासिम बीकानेरी, जयकिशन भूतड़ा, विनोद मोदी, एवं रामेश्वर भार्गव सहित गजनेर के गणमान्य जन उपस्थित रहे। आगन्तुकों के प्रति आभार शायर इरशाद अज़ीज़ ने प्रकट किया।