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ये है जिले के महारथी चुनावी रण जीतने के लिए बदले कई सारथी

By Goapl Gupta · 14 Feb 2026 · 79 views
ये है जिले के महारथी चुनावी रण जीतने के लिए बदले कई सारथी

धौलपुर (राजीव जगरिया)देश प्रदेश ही नहीं जिले में भी राजनीतिक दल बदलने की प्रथा रही है और उससे कई राजनेता अछूते नहीं रहे है तथा कुछ ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए जिस पार्टी को चुना था उसे ही छोड़कर नई पार्टी का दामन थाम लिया जब वह पार्टी भी राजनीति की नैय्या को पार लगाने में सक्षम नहीं हो पाई तो फिर दूसरी नाव में बैठकर अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में लगे हुए हैं या लगा ली है। जिले के कई ऐसे नेता है जिन्होंने अपने हित के लिए दल बदलने में ही भलाई समझी वर्तमान विधायक जसवंत सिंह ने दल बदल कर सत्ता पा ली लेकिन सरकार में हिस्सेदारी के लिए अभी भी जूझ रहे हैं तथा भाजपा से कमल का फूल खिला कर विधान सभा में दस्तक दी थी फिर किस्मत ने पलटी मारी और कई बार चुनाव लड़ने के बाद भी सफलता नहीं मिली तो हाथी की सवारी करके विधान सभा में पहुंच गए। वहीं पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने हाथी पर बैठ कर विधान सभा में अपने पैर जमाए और फिर हाथ का दामन पकड़ने में ही अपनी भलाई समझी जब कांग्रेस ने अपना हाथ खिंच लिया तो भाजपा के दम पर अपनी नींव मजबूत करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाएं। पूर्व विधायक बी एल कुशवाह को न्यायालय से सजा मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी शोभारानी कुशवाह के बलबूते पर कमल का फूल खिला कर विधानसभा में पैठ बनाई लेकिन दो बार सत्ता पाने के बाद लगा कि सत्ता की चाबी अब मिलना मुश्किल है तो फिर दल बदलने में समझदारी दिखाई और अब समाज ही नहीं राजनीति में भी अपनी पैठ बना ली है जबकि पूर्व विधायक रविन्द्र सिंह बोहरा ने कांग्रेस को छोड़कर बसपा को चुना परन्तु वह विधायक भाजपा के बैनर से ही बन पाए और उनके बेटे राजनीति में अपने पैर जमाने की कोशिश करने में जुटे हुए हैं। पूर्व जिला प्रमुख किशन चंद शर्मा भाजपा से चुने गए लेकिन बसपा से विधायकी बनने के ख्वाब देखे पर सफलता हासिल नहीं कर पाए और देर सबेर घर वापसी कर गए। पूर्व विधायक कांग्रेस नेता बनवारी लाल शर्मा के दिवंगत पुत्र अशोक शर्मा ने जिला अध्यक्ष कांग्रेस का पद छोड़ कर भाजपा के चुनाव चिन्ह पर राजाखेड़ा विधान सभा से ताल ठोकी लेकिन कामयाबी नहीं मिली और उनके परलोक सुधरने के बाद उनकी पत्नी नीरजा अशोक शर्मा अब भी अपने पैर जमाने में लगी हुई है। राजनीति में भाजपा से जन्मे रितेश शर्मा ने नगरपालिका के अध्यक्ष का पद हासिल किया फिर हाथ के चिन्ह के सहारे चलने लगे पर पिछले चुनाव में विधानसभा जाने के लिए हाथी का चुनाव किया परन्तु सफलता हाथ नहीं लगी । पूर्व वित्त मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने भी आपातकाल में कांग्रेस को छोड़ कर रेगिस्तान के ऊट पर सवार होकर विधान सभा पहुंचे थे फिर घर वापसी कर कांग्रेस के साथ रहे। सत्ता की मलाई का स्वाद चखने के लिए इन राजनेताओं ने अपने मन के हिसाब से दल तो बदले तो किसी को धूप तो किसी को छांव में ही सब्र करना पड़ा। राजीव जगरिया पत्रकार धौलपुर।
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